रोझौही में न्यूक्लियर पावर प्लांट पर आर-पार की लड़ाई
रीवा - जिले के सिरमौर तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत सरई कला के रोझौही गांव में प्रस्तावित टाटा पावर न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट को लेकर विरोध अब प्रशासनिक गलियारों तक पहुंच गया है। ग्राम सभाओं के विरोध, लगभग 210.89 हेक्टेयर भूमि आवंटन और आठ बोर होल की भू-तकनीकी जांच के बीच अब कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) का विवाद भी सामने आया है। सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी सहित क्षेत्रीय नागरिकों ने 12 अक्टूबर को संभागायुक्त रीवा को ज्ञापन सौंपकर परियोजना से संबंधित भूमि आवंटन और बोरिंग की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ग्राम सभा ने सहमति देने से इनकार किया, तो बोरिंग की अनुमति किस आधार पर दिखाई गई? ग्रामीणों की आपत्तियों और पंचायत के कथित खंडन ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। अब निगाहें प्रशासन पर हैं कि वह दस्तावेजों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करता है या ग्रामीणों की आपत्तियां सरकारी फाइलों में ही उलझकर रह जाती हैं।
ग्राम सभा का विरोध, फिर भी आगे बढ़ रही प्रक्रिया? ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि 3 सितंबर 2026 को ग्राम पंचायत सरई कला में आयोजित विशेष ग्राम सभा में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट के लिए आठ बोर होल की भू-तकनीकी जांच के संबंध में सहमति देने से इनकार किया गया था। ग्रामीणों ने संभावित विकिरण,जल,वायु और भूमि प्रदूषण, गंभीर बीमारियों की आशंका तथा विस्थापन जैसे मुद्दों को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद 6 अक्टूबर 2026 को आयोजित ग्राम सभा में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के पक्ष में लगभग 210.89 हेक्टेयर भूमि आवंटन की प्रक्रिया पर भी विरोध दर्ज कराया गया। ज्ञापन के अनुसार, ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से अनापत्ति देने से इनकार करते हुए विरोध प्रस्ताव पारित किया।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब ग्रामीण अपनी आपत्तियां ग्राम सभा के माध्यम से दर्ज करा चुके हैं,तो उनकी सहमति और आपत्तियों पर प्रशासन ने अब तक क्या कार्रवाई की है? भूमि आवंटन की प्रक्रिया में ग्राम सभा के प्रस्तावों और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों की क्या भूमिका है, इसे भी स्पष्ट किए जाने की मांग की गई है।
कथित फर्जी NOC पर बवाल,सरपंच ने पत्र क्रमांक 170/2026 को बताया गलत
इस पूरे विवाद में सबसे गंभीर सवाल ग्राम पंचायत सरई कला के लेटरहेड पर जारी बताए जा रहे अनापत्ति प्रमाण पत्र क्रमांक 170/2026 को लेकर उठे हैं। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि इस पत्र के आधार पर बोर होल करने की अनुमति दर्शाई गई, जबकि पंचायत की ओर से ऐसी अनुमति दिए जाने की बात को गलत बताया गया है। आवेदकों के मुताबिक, सरपंच श्रीमती कोमल संजय सिंह ने पंचायत के पत्र क्रमांक 56, दिनांक 8 अक्टूबर 2026 के माध्यम से संबंधित अनापत्ति प्रमाण पत्र को खारिज किया है।यदि दस्तावेज वास्तव में गलत तरीके से जारी या इस्तेमाल किया गया है, तो यह जांच का गंभीर विषय है। हालांकि, कथित फर्जीवाड़े की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में प्रशासन को संबंधित पत्रों के मूल अभिलेखों की जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि NOC किसने जारी की, किस आधार पर जारी की गई और उसका इस्तेमाल कहां-कहां किया गया।क्या विवादित NOC के आधार पर बोरिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई? क्या पंचायत के नाम पर जारी दस्तावेज की विधिवत पुष्टि की गई थी? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब दस्तावेजी जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
30 किलोमीटर के दायरे की चिंता, ग्रामीणों ने पर्यावरणीय प्रभाव पर मांगा जवाब
शिवानंद द्विवेदी सहित अन्य आवेदकों ने दावा किया है कि प्रस्तावित परियोजना को लेकर चिंता केवल रोझौही तक सीमित नहीं है।आसपास की ग्राम पंचायतों के लोग भी संभावित पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।ज्ञापन में लगभग 30 किमी के दायरे में रहने वाले लोगों की आशंकाओं को गंभीरता से लेने की मांग की गई है। ग्रामीणों की प्रमुख चिंता जल स्रोतों, पर्यावरण, स्वास्थ्य और भविष्य में संभावित विस्थापन को लेकर है।हालांकि, परियोजना के वास्तविक पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों का आकलन तकनीकी अध्ययन तथा संबंधित विशेषज्ञ संस्थाओं की रिपोर्ट के आधार पर किया जाना आवश्यक है। ग्रामीणों की मांग है कि उनकी आशंकाओं को नजरअंदाज करने के बजाय पारदर्शी तरीके से तथ्यों के साथ जवाब दिया जाए।
संभागायुक्त से कलेक्टर तक पहुंचा मामला,जांच पूरी होने तक रोक की मांग
आवेदकों ने संभागायुक्त को ज्ञापन सौंपने के साथ इसकी प्रतिलिपि कलेक्टर रीवा, एसडीएम सिरमौर और तहसीलदार सिरमौर को भी भेजी है। मांग की गई है कि ग्राम सभाओं के प्रस्तावों, भूमि आवंटन से जुड़े दस्तावेजों और कथित NOC की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, जांच पूरी होने तक विवादित भूमि आवंटन और बोर लॉगिंग की प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। आवेदकों का कहना है कि ग्राम सभा के प्रस्तावों, ग्रामीणों की आपत्तियों और पंचायत के नाम पर जारी बताए जा रहे दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट किए बिना आगे की कार्रवाई विवाद को और बढ़ा सकती है।
अब प्रशासन की जवाबदेही तय करने की बारी रोझौही का मामला अब केवल न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट के विरोध तक सीमित नहीं रह गया है। भूमि आवंटन,ग्राम सभा के प्रस्तावों और कथित NOC के विवाद ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या प्रशासन विवादित दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराएगा? क्या ग्राम सभा के विरोध और ग्रामीणों की आपत्तियों पर आधिकारिक जवाब दिया जाएगा? और जांच पूरी होने तक बोरिंग की प्रक्रिया रोकने की मांग पर क्या निर्णय होगा?इन सवालों पर प्रशासन का रुख सामने आना बाकी है। फिलहाल ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है पहले दस्तावेजों की जांच, आपत्तियों पर जवाब और प्रक्रिया में पारदर्शिता; उसके बाद ही आगे की कार्रवाई पर स्थिति स्पष्ट हो।
रिपोर्टर - अर्जुन तिवारी

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