रूपौली में टंकी निर्माण पर उठे गंभीर सवाल,क्या तकनीकी मानकों को ताक पर रखकर हो रहा सरकारी धन का इस्तेमाल?
रीवा : खबर मध्यप्रदेश के रीवा जिले से है जहां पर सरकारी योजनाओं के तहत विकास कार्य कराए जा रहे हैं,लेकिन जब निर्माण स्थल के चयन पर ही सवाल खड़े होने लगें, तो जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है। दरअसल पूरा मामला रीवा जिले की ग्राम पंचायत रूपौली से है जहां निर्माणाधीन पानी की टंकी को लेकर ऐसा ही मामला सामने आया है। ग्रामीणों का दावा है कि जिस स्थान पर टंकी का निर्माण कराया जा रहा है, वहां बारिश के मौसम में पानी भर जाता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब निर्माण स्थल पर ही जलभराव की स्थिति बनती है,तो क्या वहां टंकी का निर्माण तकनीकी मानकों और सुरक्षा के निर्धारित मापदंडों के अनुरूप कराया जा रहा है?
निर्माण स्थल का चयन किस आधार पर हुआ?
पानी की टंकी कोई सामान्य निर्माण कार्य नहीं, बल्कि ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने से जुड़ी महत्वपूर्ण संरचना है। ऐसे में निर्माण स्थल का चयन,मिट्टी की भार वहन क्षमता,जल निकासी और तकनीकी सुरक्षा जैसे पहलुओं की जांच बेहद जरूरी है। ग्रामीणों की आपत्ति के बाद सवाल उठता है कि क्या निर्माण शुरू करने से पहले इन सभी बिंदुओं की विधिवत जांच की गई थी?
यदि जांच हुई है, तो उसके निष्कर्ष क्या हैं? क्या तकनीकी स्वीकृति देने वाले अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण किया था? और यदि जलभराव की स्थिति पहले से मौजूद थी, तो उससे निपटने के लिए क्या इंतजाम किए गए?
ठेकेदार की जिम्मेदारी कौन तय करेगा?
निर्माण कार्य में गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित निर्माण एजेंसी के साथ-साथ विभागीय अधिकारियों की भी जिम्मेदारी है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि निर्माण कार्य स्वीकृत डिजाइन और निर्धारित तकनीकी शर्तों के अनुसार हो रहा है या नहीं।
सवाल यह भी है कि यदि भविष्य में जलभराव अथवा जमीन की कमजोरी के कारण निर्माण की सुरक्षा प्रभावित होती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या संबंधित अधिकारी इसकी जवाबदेही लेने को तैयार हैं?
सरकारी धन खर्च हो रहा है,तो जवाब भी देना होगा!
ग्रामीणों की आशंकाओं को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा। यदि निर्माण स्थल को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो संबंधित विभाग को मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करना चाहिए। स्थल चयन से जुड़े दस्तावेज, तकनीकी स्वीकृति, मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट और जल निकासी की व्यवस्था की जांच कर स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।
यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं। हालांकि, जांच के बिना निर्माण में अनियमितता अथवा तकनीकी नियमों के उल्लंघन का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
अब जिम्मेदार अधिकारियों से सीधे सवाल
- क्या टंकी निर्माण स्थल का चयन तकनीकी परीक्षण के बाद किया गया?
- क्या मिट्टी की भार वहन क्षमता की जांच कराई गई?
- बारिश के दौरान होने वाले जलभराव से निपटने के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
- क्या संबंधित अधिकारियों ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया है?
- क्या ग्रामीणों की शिकायत पर निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाएगी?
फिलहाल, रूपौली में निर्माणाधीन पानी की टंकी को लेकर उठे सवालों का जवाब संबंधित विभाग को देना चाहिए। विकास के नाम पर सरकारी धन खर्च करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा और उपयोगिता सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग ग्रामीणों की आशंकाओं को गंभीरता से लेकर जांच कराता है या फिर इन सवालों के जवाब के लिए ग्रामीणों को इंतजार ही करना पड़ेगा।
रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी

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