पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए सख्ती, कर वसूली से लेकर ऑनलाइन ऑडिट तक पर प्रशासन का जोर
रीवा : रीवा जिले की ग्राम पंचायतों में राजस्व वसूली की सुस्त व्यवस्था,संपत्तियों के अभिलेखों के संधारण और ऑनलाइन ऑडिट की प्रक्रिया को दुरुस्त करने के लिए अब प्रशासन ने जोर देना शुरू कर दिया है। रीवा के कृष्णा राज कपूर ऑडिटोरियम में सरपंचों, सचिवों और ग्राम रोजगार सहायकों (जीआरएस) के लिए आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ राजस्व संग्रहण,कर निर्धारण और वित्तीय अभिलेखों को व्यवस्थित रखने पर जोर दिया गया। सवाल यह है कि पंचायतों में अब तक राजस्व संग्रहण और संपत्तियों के रिकॉर्ड की व्यवस्था कितनी प्रभावी रही है और प्रशिक्षण के बाद जमीनी स्तर पर कितना बदलाव आएगा?
महात्मा गांधी राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज संस्थान,जबलपुर के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य ग्राम पंचायतों की स्वयं के स्रोतों से आय (ओएसआर) बढ़ाना, ऑनलाइन भुगतान प्रणाली को प्रभावी बनाना और दृष्टि पोर्टल पर शत-प्रतिशत प्रविष्टियां सुनिश्चित करना रहा। जिला पंचायत सीईओ सृष्टि देशमुख गौड़ा के निर्देशानुसार आयोजित प्रशिक्षण में संबंधित अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों को राजस्व प्रबंधन की प्रक्रियाओं से अवगत कराया गया।
संपत्तियां पंचायतों की, फिर राजस्व वसूली में कितनी गंभीरता?
कार्यशाला में ग्राम पंचायतों की संपत्तियों का व्यवस्थित रजिस्टर तैयार करने और उसका नियमित संधारण करने पर विशेष जोर दिया गया। प्रत्येक संपत्ति के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार कर तय करने और नियमानुसार वसूली की प्रक्रिया समझाई गई। पंचायतों को अपने आय के स्रोत विकसित करने, करों का नियमित संग्रहण करने तथा राजस्व से संबंधित अभिलेखों को व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए गए।
प्रशिक्षण का स्पष्ट संदेश रहा कि ग्राम पंचायतों को अपनी आय बढ़ाने के लिए उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करना होगा। हालांकि, वास्तविक चुनौती यह होगी कि पंचायत स्तर पर कर निर्धारण और वसूली की व्यवस्था कितनी पारदर्शी बनती है तथा निर्धारित राजस्व लक्ष्य हासिल करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
ऑनलाइन ऑडिट और दृष्टि पोर्टल पर शत-प्रतिशत प्रविष्टि का लक्ष्य
पंचायतों के वित्तीय कामकाज को व्यवस्थित करने के लिए ऑनलाइन कैशबुक, ऑडिट और दृष्टि पोर्टल पर आवश्यक प्रविष्टियां समय पर दर्ज करने के निर्देश दिए गए। इसका उद्देश्य पंचायतों के वित्तीय रिकॉर्ड को अद्यतन रखना और लेखा-जोखा व्यवस्थित करना है।
प्रशिक्षण में इस बात पर जोर दिया गया कि सरपंच, सचिव और जीआरएस अपने अधिकारों, कर निर्धारण की प्रक्रिया तथा राजस्व संग्रहण से जुड़े नियमों की पूरी जानकारी रखें। अब देखना होगा कि पंचायतों में ऑनलाइन रिकॉर्ड अद्यतन करने और वित्तीय प्रक्रियाओं के पालन की नियमित समीक्षा किस तरह की जाती है।
नल-जल योजनाओं के अधूरे काम और हस्तांतरण पर भी सवाल
ग्राम पंचायतों में संचालित नल-जल योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भी चर्चा हुई। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के अधिकारियों के साथ संवाद कर लंबित योजनाओं को पूरा कराने और योजनाओं के विधिवत हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए।
इसके साथ ही समग्र पंजीयन का कार्य प्राथमिकता से पूरा करने पर जोर दिया गया, ताकि परिवारों से संबंधित जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध हो सके। ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) तैयार करने की प्रक्रिया भी समझाई गई। पंचायतों को विकास की नौ निर्धारित थीम के आधार पर योजनाएं बनाने और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की जानकारी दी गई।
बिजली बिलों की जांच, ओवररेटेड बिल मिले तो होगा परीक्षण
पंचायतों में संचालित शासकीय विद्युत कनेक्शनों और बिजली बिलों का मुद्दा भी कार्यशाला में उठा। मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी से प्राप्त बिलों की जांच करने तथा ओवररेटेड बिल मिलने की स्थिति में उनका परीक्षण कराने पर जोर दिया गया।
इसके अलावा पंचायतों में संचालित सभी शासकीय विद्युत कनेक्शनों की सूची तैयार कर उपलब्ध कराने और प्रत्येक कनेक्शन पर अनिवार्य रूप से मीटर लगाए जाने की बात कही गई। इसका उद्देश्य बिजली बिलों की सही स्थिति स्पष्ट करना और अनावश्यक वित्तीय बोझ से बचना है।
छह जनपद पंचायतों के प्रतिनिधियों ने लिया प्रशिक्षण
जिले की छह जनपद पंचायतों के प्रतिनिधियों को दो पालियों में प्रशिक्षण दिया गया। पहली पाली में जनपद पंचायत रीवा, जवा एवं त्योंथर के सरपंच, सचिव और ग्राम रोजगार सहायक शामिल हुए, जबकि दूसरी पाली में गंगेव, रायपुर कर्चुलियान एवं सिरमौर के प्रतिनिधियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
कार्यशाला में महात्मा गांधी राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज संस्थान, जबलपुर के प्रशिक्षक डॉ. त्रिलोचन सिंह, जिला पंचायत के प्रभारी अधिकारी, संबंधित जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा पंचायत प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशिक्षण के निर्देश केवल कार्यशाला तक सीमित रहेंगे या पंचायतों में कर वसूली, संपत्ति रजिस्टर, ऑनलाइन ऑडिट और लंबित विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा भी होगी? पंचायतों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए केवल निर्देश पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए पारदर्शी व्यवस्था, नियमित निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा।
रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी

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