रीवा-मऊगंज में पोषण योजनाओं की सुस्त रफ्तार पर सख्ती

रीवा : महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की जमीनी हकीकत ने एक बार फिर कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बच्चों को पोषण आहार उपलब्ध कराने से लेकर गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच,कुपोषित बच्चों की रिकवरी और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लक्ष्यों तक में कई परियोजनाओं का प्रदर्शन निराशाजनक पाया गया। 27 अक्टूबर 2026 को जिला पंचायत रीवा के सभाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में कम प्रगति वाले क्षेत्रों पर नाराजगी जताते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा एवं मऊगंज श्रीमती सृष्टि देशमुख गौड़ा (IAS) ने अधिकारियों को कार्यप्रणाली में सुधार लाने के सख्त निर्देश दिए। साथ ही चेतावनी दी कि प्रगति में सुधार नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

पोषण आहार वितरण में पिछड़ रहीं परियोजनाएं, बच्चों को लेकर उठे सवाल
समीक्षा में सिरमौर-1, रायपुर कर्चुलियान और गंगेव-2 परियोजनाओं में बच्चों को कम से कम 21 दिन गर्म पका भोजन (HCM) मिलने के मामले में बेहद कम प्रगति सामने आई। वहीं,टेक होम राशन (THR) के 21 दिवस वितरण में गंगेव-1 और जवा की स्थिति भी निराशाजनक पाई गई।बच्चों के पोषण से सीधे जुड़े इन महत्वपूर्ण सूचकों में कमजोर प्रदर्शन ने संबंधित परियोजनाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी समीक्षा तक सीमित रहते हैं या धरातल पर भी सुधार दिखाई देता है।
गर्भवती महिलाओं की जांच और वजन वृद्धि में भी पिछड़ी परियोजनाएं
गर्भवती महिलाओं की ANC-4 जांच पूरी कराने और गर्भावस्था के दौरान उचित वजन वृद्धि सुनिश्चित करने के मामले में सिरमौर-1,जवा, त्योंथर और गंगेव-2 परियोजनाओं की स्थिति बेहद खराब पाई गई।मातृ स्वास्थ्य से जुड़े इन महत्वपूर्ण संकेतकों में अपेक्षित प्रगति नहीं होना चिंता का विषय है। ऐसे में सवाल उठता है कि गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी, स्वास्थ्य जांच और समय पर परामर्श सुनिश्चित करने के लिए मैदानी स्तर पर कितनी गंभीरता से काम किया जा रहा है?
कुपोषित बच्चों की रिकवरी में सुस्ती,संपर्क ऐप पर भी अधूरा काम
बैठक में सैम (SAM), मैम (MAM) और गंभीर कम वजन वाले (SUW) बच्चों की रिकवरी दर की भी समीक्षा की गई। सिरमौर-2 और गंगेव-1 परियोजनाओं में बच्चों की रिकवरी दर काफी कम दर्ज की गई। इसके अलावा संपर्क ऐप में बच्चों का पंजीयन, सत्यापन,नियमित फॉलो-अप और भूख की जांच जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी कमियां सामने आईं।
कुपोषित बच्चों की पहचान और समय पर देखभाल सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे में इन मामलों में कमजोर प्रदर्शन को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को सुधार के निर्देश दिए गए।
मातृ वंदना योजना और NRC के लक्ष्य भी अधूरे
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के तहत लक्ष्य प्राप्ति में गंगेव-1, गंगेव-2 और सिरमौर-1 परियोजनाएं पीछे रहीं। वहीं, पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में बच्चों की भर्ती के लक्ष्यों को हासिल करने के मामले में सेमरिया, गंगेव और सिरमौर की उपलब्धि असंतोषजनक पाई गई।
इन आंकड़ों ने हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने और पात्र बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्रों तक लाने के प्रयासों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं।
अच्छा प्रदर्शन करने वालों की सराहना,कमजोर परियोजनाओं को सुधारने की मोहलत
बैठक में जहां कमजोर प्रदर्शन करने वाली परियोजनाओं पर नाराजगी जताई गई, वहीं प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती के लक्ष्यों तथा CBE/VHSND के शत-प्रतिशत आयोजन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों का उत्साहवर्धन भी किया गया।
सीईओ जिला पंचायत ने स्पष्ट किया कि जिन क्षेत्रों में बेहतर परिणाम मिल रहे हैं, वहां भी किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाए। अच्छे प्रदर्शन को बनाए रखते हुए योजनाओं के क्रियान्वयन में और सुधार लाने के लिए लगातार प्रयास किए जाएं।
कम वजन वाले बच्चों के लिए थर्ड मील पर भी चर्चा
बैठक में कम वजन वाले बच्चों को थर्ड मील (रेडी टू ईट) उपलब्ध कराने के विषय पर भी चर्चा हुई। इस संबंध में जिला स्तर पर जल्द निर्णय लेकर क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ने के निर्देश दिए गए।
समयबद्ध कार्ययोजना बनाने के निर्देश,लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी
बैठक के अंत में सभी संबंधित अधिकारियों को कम प्रगति वाले क्षेत्रों में हितग्राही पंजीयन बढ़ाने और निर्धारित लक्ष्यों की शत-प्रतिशत पूर्ति के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। SAM/MAM/SUW बच्चों का संपर्क ऐप में पंजीयन एवं सत्यापन, नियमित फॉलो-अप, भूख की जांच और शाला पूर्व शिक्षा (ECCE) में बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में जिला रीवा के कार्यक्रम अधिकारी नयन सिंह, जिला मऊगंज के कार्यक्रम अधिकारी आशीष द्विवेदी सहित दोनों जिलों के समस्त बाल विकास परियोजना अधिकारी एवं पर्यवेक्षक मौजूद रहे।
अब बड़ा सवाल यह है कि समीक्षा बैठक में मिली चेतावनी के बाद जमीनी स्तर पर कितना सुधार होता है? बच्चों के पोषण, कुपोषण से मुक्ति और गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी योजनाओं में कमजोर प्रदर्शन का असर सीधे हितग्राहियों पर पड़ सकता है। ऐसे में केवल निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि अगली समीक्षा में परिणामों की वास्तविक स्थिति सामने आना भी जरूरी है।

रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी 

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