पार्टी की भक्ति में देशहित से समझौता क्यों?पंडित सतीश चौबे के बयान ने राजनीतिक खेमों में मचाई हलचल!

रेवा : राजनीति में पार्टी के प्रति वफादारी और देश के प्रति जिम्मेदारी के बीच बढ़ती खाई को लेकर अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के मध्यप्रदेश के प्रदेश सचिव पंडित सतीश चौबे ने ऐसा संदेश दिया है, जिसने राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है। उनका सीधा सवाल है कि आखिर अपनी पसंदीदा पार्टी की गलतियों पर समर्थक चुप क्यों हो जाते हैं? क्या राजनीतिक निष्ठा इतनी बड़ी हो गई है कि देशहित के मुद्दों पर भी आंखें बंद कर ली जाएं?

पंडित सतीश चौबे ने अपने संदेश में स्पष्ट कहा कि अपनी पसंद की पार्टी की गलतियों पर चुप रहना देशभक्ति नहीं, बल्कि सिर्फ पार्टी प्रेम है।पार्टियां आती-जाती रहती हैं, सत्ता बदलती रहती है, नेता बदलते रहते हैं,लेकिन देश हमेशा रहना चाहिए। इसलिए किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन करते समय उसकी गलतियों पर सवाल उठाने का साहस भी होना चाहिए।
उनके इस बयान ने उस राजनीतिक मानसिकता पर सीधा प्रहार किया है,जहां कई बार पार्टी के समर्थक अपने दल के नेताओं की गलतियों को भी सही ठहराने में जुट जाते हैं। भ्रष्टाचार हो, जनविरोधी फैसला हो या जनता से जुड़ा कोई गंभीर मुद्दा पार्टी के नाम पर सवालों को दबाने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
सवाल सिर्फ सत्ता पक्ष का नहीं,विपक्ष का भी है।लोकतंत्र में कोई भी राजनीतिक दल सवालों से ऊपर नहीं हो सकता। जनता का काम केवल समर्थन करना नहीं,बल्कि गलतियों पर जवाब मांगना भी है। जो समर्थक अपनी ही पार्टी से सवाल नहीं कर सकता, वह लोकतांत्रिक जवाबदेही को कमजोर करने में कहीं न कहीं भागीदार बनता है।
बड़ा सवाल: देशभक्ति बड़ी है या पार्टी की अंधभक्ति? क्या राजनीतिक दलों के प्रति वफादारी निभाने के चक्कर में जनता अपने ही देश और लोकतंत्र के हितों को नजरअंदाज कर रही है?
पंडित सतीश चौबे का संदेश राजनीतिक दलों के समर्थकों के लिए आत्ममंथन का विषय है। संदेश साफ है—पार्टी का समर्थन कीजिए, लेकिन उसकी गलतियों का बचाव मत कीजिए। क्योंकि पार्टी से बड़ा देश है, नेता से बड़ा संविधान है और राजनीतिक निष्ठा से बड़ी जनता के प्रति जवाबदेही है।

रिपोर्टर : अर्जुन  तिवारी 

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.