बेलहा पड़िया में सीमेंट उद्योग के खिलाफ किसानों का आर-पार का ऐलान, बोले जान दे देंगे, जमीन नहीं!

रेवा : हीडलबर्ग सीमेंट प्रोजेक्ट पर भड़का किसानों का आक्रोश, 200 से 250 परिवारों के उजड़ने और रीवा शहर तक प्रदूषण फैलने की आशंका; कलेक्टर को सैकड़ों किसानों ने सौंपा विरोध पत्र, प्रोजेक्ट निरस्त नहीं हुआ तो होगा बड़ा आंदोलन! रीवा जिले में औद्योगिक विकास के नाम पर किसानों की जमीन पर नजर डालने का आरोप लगाते हुए अब बेलहा पड़िया के किसानों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हुजूर तहसील के ग्राम बेलहा पड़िया में हीडलबर्ग सीमेंट इंडिया लिमिटेड को सीमेंट उद्योग स्थापित करने की अनुमति दिए जाने की जानकारी सामने आने के बाद क्षेत्र के किसानों में भारी आक्रोश है। किसानों ने दो टूक शब्दों में ऐलान कर दिया है कि किसी भी कीमत पर अपनी पुश्तैनी जमीन सीमेंट उद्योग के लिए नहीं देंगे। सवाल यह है कि आखिर किसके विकास के लिए किसानों को उनकी जमीन से बेदखल करने की तैयारी की जा रही है?

संयुक्त किसान मोर्चा के नेता एवं किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय महासचिव एडवोकेट शिव सिंह ने बताया कि कार्यालय कलेक्टर, खनिज शाखा जिला रीवा के इश्तहार पत्र क्रमांक 1366, दिनांक 21 अक्टूबर 2026 के माध्यम से ग्राम पंचायत पड़िया क्षेत्र के किसानों को इस प्रस्तावित सीमेंट उद्योग की जानकारी मिली। इसके बाद 29 अक्टूबर को सैकड़ों किसानों ने कलेक्टर रीवा के समक्ष लिखित आपत्ति दर्ज कराते हुए परियोजना का विरोध किया है।
200 से 250 किसान परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट
शिव सिंह का आरोप है कि प्रस्तावित सीमेंट उद्योग स्थापित होने से बेलहा पड़िया के करीब 200 से 250 कृषक परिवारों के सामने बेघर होने और आजीविका छिनने का संकट खड़ा हो जाएगा। इन परिवारों के पास पहले से ही छोटी-छोटी जोत की कृषि भूमि है, जिस पर उनका जीवन और परिवार का भरण-पोषण निर्भर है। यदि यह जमीन उद्योग के लिए चली गई तो इन परिवारों के सामने खाने-पीने और जीवनयापन का गंभीर संकट पैदा होगा। किसानों का सवाल है कि जमीन छिनने के बाद उनके परिवारों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
सीमेंट उद्योग से रीवा शहर तक प्रदूषण फैलने की आशंका
किसान नेता ने पर्यावरण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सीमेंट उद्योग का असर केवल बेलहा पड़िया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के गांवों के साथ रीवा शहर भी गंभीर प्रदूषण की चपेट में आ सकता है। ऐसे में औद्योगिक परियोजना को मंजूरी देने से पहले किसानों की सहमति, ग्राम सभा की भूमिका और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी।
मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम पर शिव सिंह का सीधा हमला
शिव सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार और डिप्टी सीएम पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सीमेंट उद्योगपति और सत्ता से जुड़े लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किसानों एवं ग्राम सभा की सहमति लिए बिना किसान और आमजन विरोधी निर्णय लिया गया है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या औद्योगिक विकास का मतलब किसानों की जमीन और उनके भविष्य को दांव पर लगाना है?
प्रोजेक्ट निरस्त नहीं हुआ तो सड़कों पर उतरेंगे किसान
किसानों ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी परिस्थिति में अपनी जमीन सीमेंट उद्योग के लिए नहीं देंगे। संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार से तत्काल प्रस्तावित परियोजना निरस्त करने की मांग की है। शिव सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने किसानों की आपत्तियों को अनसुना कर परियोजना आगे बढ़ाने की कोशिश की तो क्षेत्र में बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। अब देखना होगा कि सरकार किसानों की आवाज सुनती है या औद्योगिक परियोजना के नाम पर उनके विरोध को नजरअंदाज करती है।

रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी 

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