देश का सबसे रईस शहर: दिल्ली या मुंबई ?
BY-UJJWAL SINGH
देश में आर्थिक विकास और कमाई के मामले में हमेशा से बहस रहती है कि कौन सा राज्य या शहर सबसे आगे है. अक्सर दिल्ली की राजधानी का चमकता चेहरा और मुंबई की माया नगरी हमारे जेहन में आती है. हाल ही में दिल्ली सरकार द्वारा पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े इस बहस को फिर से उजागर कर रहे हैं. यह आंकड़े न केवल महानगरों के आर्थिक दबदबे को दिखाते हैं, बल्कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में आम आदमी की कमाई की स्थिति को भी स्पष्ट करते हैं.
दिल्ली और मुंबई: प्रति व्यक्ति आय में मुकाबला
कमाई की दौड़ में दिल्ली और मुंबई हमेशा से शीर्ष पर रहे हैं. दिल्ली के आर्थिक सर्वे के मुताबिक, यहां एक औसत व्यक्ति की वार्षिक आय लगभग 5,31,610 रुपये है, जो पिछले साल की तुलना में 8 प्रतिशत अधिक है और राष्ट्रीय औसत से ढाई गुना ज्यादा है. लेकिन मुंबई के मामले में यह आंकड़ा 6.5 लाख रुपये के आसपास है. इसका मतलब है कि सालाना कमाई में मुंबई के लोग दिल्ली वालों से अभी भी आगे हैं.
अन्य महानगरों की स्थिति
देश के अन्य महानगरों की स्थिति इस मुकाबले में उतनी मजबूत नहीं है. दक्षिण भारत का प्रमुख केंद्र चेन्नई में प्रति व्यक्ति आय लगभग 3.5 लाख रुपये है. वहीं, कोलकाता में यह केवल 1.55 लाख रुपये है, जो सबसे कम है. तकनीकी हब बनने के कारण बेंगलुरु अब इन सभी शहरों को चुनौती दे रहा है, और उसकी प्रति व्यक्ति आय कई मायनों में पारंपरिक महानगरों को पीछे छोड़ रही है.
उत्तर प्रदेश और बिहार: कमाई का अंतर
उत्तर प्रदेश में पिछले आठ वर्षों में प्रति व्यक्ति आय दोगुनी हो गई है और अब यह 1.26 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है. हालांकि यह दिल्ली और मुंबई के मुकाबले कम है, लेकिन विकास की रफ्तार स्पष्ट दिखाई देती है. बिहार की स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहां प्रति व्यक्ति आय केवल 76,490 रुपये है. यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से भी काफी कम है और बड़े राज्यों में आर्थिक असमानता को दर्शाता है.
देश के आर्थिक नक्शे पर देखा जाए तो दिल्ली और मुंबई शीर्ष पर हैं, लेकिन मुंबई अब भी आर्थिक राजधानी होने का तमगा सुरक्षित रखती है. वहीं, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े राज्य अभी भी आर्थिक रूप से पीछे हैं. यह आंकड़े केवल कमाई के अंतर को नहीं, बल्कि राज्यों के बीच मौजूद आर्थिक खाई और विकास की दिशा को भी उजागर करते हैं.
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