रीवा की बाढ़ पीड़ित जनता का दर्द सुने बिना लौट गए मुख्यमंत्री, शिव सिंह ने साधा निशाना
रीवा : जिले में आई बाढ़ और जलभराव से तबाही के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के रीवा दौरे को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव शिव सिंह ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। शिव सिंह ने आरोप लगाया कि बाढ़ से जूझ रही जनता को मुख्यमंत्री से राहत, स्थायी समाधान और संवेदनशीलता की उम्मीद थी, लेकिन उनका दौरा महज औपचारिकता बनकर रह गया| शिव सिंह ने कहा कि रीवा शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक, विशेषकर त्योंथर और जवा के तराई क्षेत्रों में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। उनके मुताबिक रीवा शहर का बड़ा हिस्सा जलमग्न रहा और लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि हर वर्ष सामने आने वाली जलभराव और बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान करने के बजाय सरकार के कथित ‘विनाशकारी विकास’ ने हालात और गंभीर कर दिए हैं।
‘दो मिनट के दौरे से जनता का दर्द कैसे समझेंगे?’
शिव सिंह का आरोप है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे के नाम पर मुख्यमंत्री रीवा पहुंचे, लेकिन गुलाब नगर सामान बांध क्षेत्र में बेहद कम समय रुकने के बाद वापस लौट गए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मुख्यमंत्री ने वास्तव में बाढ़ की भयावहता का जायजा लेना था तो प्रभावित परिवारों के बीच जाकर उनकी समस्याएं क्यों नहीं सुनी गईं?
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के अल्पकालिक दौरे के दौरान शहर में यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। आम लोगों को आवागमन में परेशानी हुई और एंबुलेंस तक फंसने की स्थिति बनी। शिव सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों द्वारा आम नागरिकों को सड़कों से हटाया गया, जिससे लोगों में नाराजगी रही।
‘जनता को चाहिए था समाधान,मिला सिर्फ औपचारिक दौरा’
शिव सिंह ने कहा कि रीवा की जनता को उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री बाढ़ की जमीनी स्थिति देखेंगे, उपमुख्यमंत्री और स्थानीय प्रशासन के विकास कार्यों का जायजा लेंगे तथा हर साल आने वाली बाढ़ की समस्या से स्थायी निजात दिलाने के लिए ठोस घोषणा करेंगे। उन्होंने कहा कि बाढ़ पीड़ित परिवारों को आर्थिक नुकसान का आकलन, राहत, जल निकासी की स्थायी व्यवस्था और भविष्य में बाढ़ की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना की जरूरत है। लेकिन जनता के बीच यह सवाल रह गया कि आखिर मुख्यमंत्री का दौरा बाढ़ पीड़ितों का दर्द सुनने आया था या केवल प्रशासनिक औपचारिकता पूरी करने?
शिव सिंह ने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि “रीवा की बाढ़ पीड़ित जनता अपना दर्द लेकर खड़ी रही, लेकिन मुख्यमंत्री बिना उसका दर्द सुने ही वापस चले गए।” उन्होंने सरकार से मांग की कि रीवा में बाढ़ और जलभराव की समस्या पर तत्काल उच्चस्तरीय समीक्षा कर स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
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