सासाराम के धौड़ाड़ गांव में कौतूहल और भक्ति का अनोखा दृश्य
रोहतास : प्रखंड के धौड़ाड़ गांव स्थित काली मंदिर परिसर में चल रहे श्री-श्री शतचंडी महायज्ञ के दौरान एक ऐसी घटना घटी जिसने सभी श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। यह घटना न केवल क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है बल्कि लोगों की आस्था और विश्वास को और भी गहरा कर गई है। चिंतावनपुर गांव निवासी पप्पू कुमार के चार वर्षीय पुत्र प्रिंस ने इस महायज्ञ में जो कर दिखाया, वह हर किसी के लिए हैरानी और भक्ति से परिपूर्ण क्षण बन गया। महायज्ञ के दौरान प्रिंस ने अपनी मां के साथ में बिना थके और बिना रुके लगातार 108 बार यज्ञ मंडप की परिक्रमा की। इतनी कम उम्र में इतनी दृढ़ आस्था और शारीरिक सहनशक्ति का प्रदर्शन देख वहां उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालु हैरान रह गए। प्रिंस की यह भक्ति और संकल्प शक्ति लोगों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं लगी। जैसे-जैसे फेरे पूरे होते गए, वैसे-वैसे वहां मौजूद लोगों की भीड़ में उत्साह और श्रद्धा का संचार होता गया। बच्चे की मासूम भक्ति ने हर किसी के हृदय को स्पर्श किया। यज्ञ मंडप में उपस्थित श्रद्धालु और पुरोहितों ने इस दृश्य को ईश्वर की अनुकंपा और बच्चे के पूर्व जन्म के संचित पुण्य का फल बताया। लोगों ने उसे स्नेह और सम्मान से 'बाल भगवान' की उपाधि दी। प्रिंस की यह भक्ति अब पूरे गांव और आसपास के इलाकों में आस्था का प्रतीक बन गई है। बच्चे के पिता पप्पू कुमार और माता भी इस अद्भुत अनुभव से भाव-विभोर नजर आए। उन्होंने इसे अपने जीवन का सबसे अनमोल पल बताया और कहा कि यह सब ईश्वर की कृपा से संभव हुआ है। यज्ञ के दौरान इस घटना ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। एक ओर जहां वयस्क भी लगातार फेरे लेने में थकान महसूस कर रहे थे, वहीं प्रिंस ने अपनी नन्ही काया में ऐसी अपार ऊर्जा का परिचय दिया कि सभी आश्चर्यचकित रह गए। बच्चे की भक्ति भावना इतनी गहरी थी कि उसने थकावट या असुविधा का कोई संकेत तक नहीं दिया। उसकी आँखों में केवल भक्ति और मन में केवल एक ही लगन - माँ काली के प्रति अपनी निष्ठा को पूरा करना - दिखाई दे रही थी। इस दृश्य के बाद काली मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ और भी बढ़ गई। हर कोई इस 'बाल भगवान' के दर्शन करने और उसे आशीर्वाद देने के लिए उत्सुक नजर आया। महायज्ञ के आयोजकों ने भी प्रिंस के इस संकल्प को एक मिसाल बताया और उसकी भक्ति भावना की सराहना की।यह घटना सासाराम प्रखंड के लिए सिर्फ एक साधारण धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि भक्ति और श्रद्धा की जीवंत मिसाल बन गई। प्रिंस की यह कहानी न केवल गांव में बल्कि पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। उसकी नन्ही भक्ति ने यह साबित कर दिया कि सच्ची श्रद्धा उम्र की मोहताज नहीं होती।
रिपोर्टर : पंकज कुमार
No Previous Comments found.