समिति अध्यक्ष से अनजान रहकर नियमों की अनदेखी के बीच पोखरा की हुई नीलामी, सवालों के घेरे में अधिकारी और प्रक्रिया
रोहतास : रोहतास जिले के सासाराम प्रखंड अंतर्गत धौड़ाढ़ गांव से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रखंड स्तरीय मत्स्यजीवी सहयोग समिति लिमिटेड, सासाराम के तहत संचालित एक पोखरा की नीलामी नियमों को ताक पर रखकर कर दी गई। इस नीलामी प्रक्रिया में समिति के नियमों और सदस्य अधिकारों की जिस तरह अनदेखी की गई है, बताया जा रहा है कि नियमों के मुताबिक मत्स्यजीवी समिति के अंतर्गत आने वाले किसी भी पोखरा में केवल समिति के पंजीकृत सदस्यों को ही मछली पालन करने का अधिकार होता है। यह नियम इसलिए बनाए गए हैं ताकि मत्स्य पालन से जुड़े स्थानीय सदस्य आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। लेकिन धौड़ाढ़ गांव के इस पोखरा के मामले में नियमों की खुलकर धज्जियां उड़ाई गईं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस पोखरा की नीलामी समिति के बाहर के लोगों को कर दी गई, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि नियमों की अनदेखी जानबूझकर की गई। और सबसे हैरानी की बात यह है कि खुद समिति के अध्यक्ष देवराज बिंद को इस नीलामी प्रक्रिया की कोई सूचना तक नहीं दी गई। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि न तो उन्हें इस नीलामी की जानकारी थी और न ही उनके द्वारा किसी प्रकार की स्वीकृति दी गई। इस प्रकरण ने समिति की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि अध्यक्ष को ही इसकी जानकारी नहीं है, तो आखिर यह नीलामी किसके आदेश पर और किनकी मिलीभगत से संपन्न हुई? इससे यह भी आशंका गहराने लगी है कि कहीं न कहीं विभागीय मिलीभगत और भ्रष्टाचार की बू इस पूरे मामले में छुपी हो सकती है। लोगों ने अपने निजी हित के लिए समिति के नियमों को नजरअंदाज किया है। सदस्यों का कहना है कि इस तरह की मनमानी से उनके हक को छीनने का काम हो रहा है, और यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो भविष्य में अन्य समितियों में भी इस तरह की अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। अब ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही यह भी सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या इस नीलामी के पीछे प्रखंड स्तर के अधिकारियों की भी भूमिका है? बहरहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
रिपोर्टर : पंकज कुमार

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