Roti-Rice Report: टमाटर और एलपीजी की बढ़ती कीमतों से क्या बिगड़ रहा है रसोई का बजट?

घरेलू रसोई का बजट फिलहाल राहत के मूड में नहीं दिख रहा। क्रिसिल इंटेलिजेंस की 'रोटी-राइस रेट' रिपोर्ट के मुताबिक टमाटर, खाद्य तेल और एलपीजी सिलेंडर की ऊंची कीमतें आने वाले समय में भी घर का खाना महंगा बनाए रख सकती हैं। हालांकि आलू के दाम कम होने से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन बाकी जरूरी सामान की महंगाई ने उसका असर काफी हद तक कम कर दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, जून में घर पर तैयार होने वाली शाकाहारी थाली की लागत पिछले साल की तुलना में करीब 5 फीसदी बढ़ी, जबकि मांसाहारी थाली बनाने का खर्च लगभग 6 फीसदी अधिक रहा।

टमाटर और एलपीजी के दाम बढ़ने की वजह क्या है

रिपोर्ट में बताया गया है कि फरवरी और मार्च के दौरान सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने के कारण टमाटर की गर्मी वाली फसल की बुवाई प्रभावित हुई। इसका असर उत्पादन पर पड़ा और बाजार में टमाटर के दाम सालाना आधार पर करीब 31 फीसदी तक बढ़ गए।

वहीं, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक आपूर्ति पर पड़ा, जिससे वनस्पति तेल और एलपीजी की कीमतों में भी करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके अलावा, महंगे रबी स्टॉक के बाजार में आने से प्याज के दाम भी ऊंचे रहे। हालांकि नई रबी फसल की आवक के चलते आलू करीब 14 फीसदी सस्ता हुआ, जिससे कुल खाद्य लागत पर दबाव कुछ कम हुआ।

नॉन-वेज थाली क्यों हुई महंगी?

मांसाहारी भोजन की लागत बढ़ने के पीछे चिकन की कीमतों में उछाल बड़ी वजह रही। रिपोर्ट के मुताबिक, अत्यधिक गर्मी के कारण पोल्ट्री सेक्टर प्रभावित हुआ। इससे पक्षियों की मृत्यु दर बढ़ी, उनका वजन घटा और नए चूजों का पालन-पोषण भी चुनौतीपूर्ण हो गया। नतीजतन ब्रॉयलर की उपलब्धता कम हुई और चिकन के दाम सालाना आधार पर करीब 7 फीसदी बढ़ने का अनुमान है। ब्रॉयलर की कीमतें नॉन-वेज थाली की कुल लागत में लगभग आधी हिस्सेदारी रखती हैं।

मई के मुकाबले जून में भी बढ़ा खर्च

अगर महीने-दर-महीने तुलना करें तो जून में शाकाहारी थाली की लागत करीब 4 फीसदी और मांसाहारी थाली की लागत लगभग 3 फीसदी बढ़ी। इसकी मुख्य वजह टमाटर, प्याज और आलू के दामों में मई की तुलना में आई तेजी रही।

रिपोर्ट का कहना है कि यदि टमाटर, खाद्य तेल और एलपीजी जैसी प्रमुख वस्तुओं की कीमतों में जल्द राहत नहीं मिलती, तो घरेलू खाने का खर्च ऊंचा बना रह सकता है। हालांकि, आने वाले महीनों में मौसमी सब्जियों की बेहतर आवक और आपूर्ति सामान्य होने पर रसोई के बजट पर पड़ रहा दबाव कुछ कम होने की उम्मीद है।

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