रोजा इफ्तार के समय की गईं ये गलतियां करती हैं सेहत को नुकसान, जानें किन बातों का रखें ध्यान
इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना रमजान बेहद पवित्र माना जाता है। माना जाता है कि इसी महीने कुरान शरीफ नाज़िल हुआ था। इसलिए इस पूरे महीने में मुसलमान सहरी के बाद से लेकर शाम की मगरिब की अज़ान तक रोज़ा रखते हैं। दिनभर बिना कुछ खाए-पीए इबादत करने के बाद नमाज़ अदा की जाती है और फिर इफ्तार किया जाता है। यह महीना सब्र, इबादत और आत्मचिंतन का होता है।

धार्मिक महत्व के साथ-साथ रोज़ा रखने के कुछ स्वास्थ्य लाभ भी माने जाते हैं। लंबे समय तक कुछ न खाने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है। हालांकि, इफ्तार के समय अगर सही खानपान न अपनाया जाए तो सेहत से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बीमार व्यक्ति या विशेष स्वास्थ्य स्थितियों में रोज़ा रखने से पहले डॉक्टर की सलाह ज़रूर लेनी चाहिए।
डायटीशियन मोहिनी डोंगरे के अनुसार, पूरे दिन पानी न पीने के कारण शरीर डिहाइड्रेट हो सकता है, इसलिए इफ्तार के समय सावधानी बरतना जरूरी है। आइए जानते हैं इफ्तार के दौरान किन गलतियों से बचना चाहिए:
1. एकदम ज्यादा पानी पी लेना
दिनभर प्यासे रहने के बाद कई लोग इफ्तार में अचानक बहुत सारा या बेहद ठंडा पानी पी लेते हैं। इससे पेट भारी लग सकता है, उल्टी या बेचैनी महसूस हो सकती है। बेहतर है कि पानी धीरे-धीरे और घूंट-घूंट करके पिएं।
2. बाजार की कार्बोनेटेड ड्रिंक्स लेना
सोडा या अन्य फिज़ी ड्रिंक्स पेट में गैस और सूजन पैदा कर सकती हैं। इसकी जगह नींबू पानी या अन्य प्राकृतिक पेय लेना ज्यादा फायदेमंद रहता है, जो शरीर को ऊर्जा भी देते हैं और पाचन में मदद करते हैं।
3. ज्यादा तला-भुना और मसालेदार खाना
इफ्तार में तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं, लेकिन अत्यधिक तली हुई और मसालेदार चीजें एसिडिटी, गैस और ब्लोटिंग की वजह बन सकती हैं। हल्का और संतुलित भोजन लेना बेहतर होता है।

4. अधिक मिठाई खाना
रमजान में सेवइयां, खीर और अन्य मिठाइयां खूब बनाई जाती हैं। लेकिन जरूरत से ज्यादा मीठा खाने से वजन बढ़ सकता है और ब्लड शुगर भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए मिठाई सीमित मात्रा में ही लें।

5. इफ्तार के तुरंत बाद आराम करना
इफ्तार के बाद तुरंत लेट जाना या आराम करना पाचन के लिए ठीक नहीं है। इससे पेट दर्द या अपच की समस्या हो सकती है। बेहतर है कि खाने के 5–10 मिनट बाद कम से कम 15–20 मिनट टहल लें या वज्रासन में बैठें।

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