आरएसएस की फंडिंग और संपत्ति को लेकर पारदर्शिता की मांग तेज
कर्नाटक की राजनीति में आरएसएस की कानूनी स्थिति और पारदर्शिता को लेकर नया विवाद सामने आया है। राज्य के मंत्री प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से उसके पंजीकरण, आय के स्रोत, खर्च, संपत्तियों और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
खरगे ने मोहन भागवत को लिखे पत्र में कहा कि जो संगठन देशभर में हजारों शाखाएं और बड़े स्तर पर गतिविधियां चलाता है, उसे भी अन्य संस्थाओं की तरह कानून के दायरे में पंजीकृत होना चाहिए और अपने वित्तीय रिकॉर्ड सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सार्वजनिक गतिविधियों और बड़े जनसमूह के साथ काम करने वाले संगठनों के लिए जवाबदेही जरूरी है।
वहीं, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने इस मांग को राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि संगठन खुला और सार्वजनिक रूप से कार्य करता है तथा इसकी सभी गतिविधियां लोगों के सामने होती हैं। भागवत ने यह भी कहा कि आरएसएस पर पहले भी प्रतिबंध लग चुके हैं, लेकिन समय के साथ उसकी वैधता और अस्तित्व को लेकर सरकारों की स्थिति स्पष्ट रही है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि संगठन के पास किसी तरह की गोपनीयता नहीं है और इसके कार्यकर्ता समाज में सक्रिय रूप से काम करते हैं। साथ ही उन्होंने यह तर्क दिया कि कई सामाजिक और धार्मिक परंपराएं भी औपचारिक पंजीकरण के बिना संचालित होती हैं।
यह मुद्दा अब राजनीतिक और वैचारिक बहस का रूप ले चुका है, जिसमें एक तरफ पारदर्शिता और कानूनी जवाबदेही की मांग है, तो दूसरी तरफ संगठन की स्वायत्तता और ऐतिहासिक स्थिति पर जोर दिया जा रहा है।
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