यूपी की गोशालाएं बनेंगी आत्मनिर्भर, गोबर-गोमूत्र से खुलेगा करोड़ों की आय का रास्ता

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। योजना के तहत गोबर से ऊर्जा, गोमूत्र से मूल्यवर्धित उत्पाद और गो-आधारित उद्योगों के जरिए रोजगार और आय के नए अवसर विकसित किए जाएंगे। इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने लखनऊ में उद्यमियों, नवाचारी किसानों, गोसेवी संस्थाओं और गोशाला संचालकों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया।

200 गायों की गोशाला से ₹2 करोड़ सालाना आय का दावा

ग्लोबल कन्फेडरेशन ऑफ काउ-बेस्ड इंडस्ट्रीज के सचिव पुरीष कुमार ने बताया कि यदि 200 गायों वाली गोशाला में दूध, गोबर और गोमूत्र का वैज्ञानिक तरीके से मूल्यवर्धन कर बायोगैस, जैविक खाद और प्राकृतिक कृषि उत्पाद तैयार किए जाएं, तो सालाना करीब ₹2 करोड़ तक की संभावित आय अर्जित की जा सकती है। इससे गोशालाएं केवल संरक्षण केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण उद्यम का मजबूत आधार बन सकती हैं।

गोबर और गोमूत्र से तैयार होंगे ऊर्जा व जैविक उत्पाद

गुजरात के बनासकांठा जिले की गोमूत्र डेयरी से जुड़े देवाराम पुरोहित ने बताया कि गोमूत्र के वैज्ञानिक प्रसंस्करण से प्राकृतिक खेती के लिए उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीणों को रोजगार मिलने के साथ रसायनमुक्त खेती को भी बढ़ावा मिल रहा है।

गोशालाओं को बनाया जाएगा बायो-इकोनॉमी हब

ग्राम धाम गोशाला, सिद्धपुरा (लखनऊ) के संचालक एवं पूर्व पुलिस उपाधीक्षक शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने गोवंश आधारित विद्युत उत्पादन मॉडल की जानकारी दी। वहीं, पे अमृत संस्था के निदेशक प्रवीण मिश्रा ने कहा कि भविष्य में गोशालाएं केवल गोसंरक्षण केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण सर्कुलर बायो-इकोनॉमी हब के रूप में विकसित होंगी।

तकनीक और बाजार से जुड़ेंगे ग्रामीण युवा

रूरल हब इनोवेशंस लिमिटेड के गौरव गुप्ता ने गोशालाओं को आधुनिक तकनीक, नवाचार और बाजार से जोड़कर ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर विकसित करने पर जोर दिया।

सरकार सफल मॉडलों को पूरे प्रदेश में करेगी लागू

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप प्रदेश की गोशालाओं में हो रहे नवाचारों को श्रेष्ठ तकनीकों और सफल मॉडलों से जोड़ा जाएगा, ताकि गोसंरक्षण के साथ आत्मनिर्भरता और ग्रामीण समृद्धि का स्थायी मॉडल विकसित किया जा सके।

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