श्रावण में सेवा की मिसाल: डॉ. सूरज कुमार ने सिमलिया प्राइमरी स्कूल के बच्चों को कराया तिथि भोजन
साबरकांठा : डॉ. सूरज कुमार ने प्राइमरी स्कूल के बच्चों को तिथि का खाना परोसा गया इसी मौके पर बच्चों और टीचरों में खुशी का माहौल देखने को मिला 250 से अधिक स्कूल के बच्चों को यह भोजन प्रसाद की सेवा दी गई तब बच्चों और टीचरों ने डॉ. सूरज कुमार के लिए अपना प्यार जताया।
डॉ. सूरज कुमार ने बचपने अपने गांव की इसी स्कूल में पढ़ाई की और डॉक्टर की डिग्री लेने के लिए कई जगहों पर अपने को तनतोड मेहनत से पढ़ाई की और आखिर में राजस्थान में पढ़ाई करके डॉक्टर की डिग्री हासिल किया
डॉ. सूरज कुमार ने अपने सिमलिया गांव में कई सेवाएं दी हैं और समाज में कोई भी सेवा देने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। उनका व्यक्तित्व हमेशा दयालु सरल और एक दूसरे पर प्यार जताने वाले है। उन्होंने एक डॉक्टर के तौर पर, अपने सिमलिया गांव में अपना क्लिनिक लंबे समय से सेवाएं दे रहे है। डॉ. सूरज कुमार ने बताया बताया की मे बहुत अच्छी जगह पर एक बहुत अच्छा क्लिनिक शरू कर सकता था और उनकी डॉक्टर की सेवा के लिए बहुत बड़े-बड़े ऑफर आए लेकिन उन्होंने सोचा कि जिस गांव में मैं पला-बढ़ा हुआ इस गांव ने मुझे प्यार दिया और इसी गांव में पढ़ा-लिखा और आज डॉक्टर की डिग्री ले ली इसलिए मैंने अपने गांव के मरीजों की सेवा करने के मकसद से अपने गांव में एक क्लिनिक खोल दीया और आज मैं उनकी सेवा कर रहा हूं।
एक डॉक्टर समाज का एक अहम सेवक होता है, वह मरीजों की जांच करता है और उन्हें ठीक करता है। उसे भगवान के बाद दूसरा स्थान दिया जाता है। एक डॉक्टर की ज़िंदगी इतनी आसान नहीं होती क्योंकि उसे अलग-अलग लक्षणों वाले कई मरीजों से निपटना पड़ता है। अपनी स्किल्स का इस्तेमाल करके वह ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की जान बचाने की कोशिश करता रहता है। पूरी दुनिया में डॉक्टरों को भगवान के बाद दूसरा स्थान दिया जाता है।
एक डॉक्टर की ज़िंदगी बहु बिजी होती है उनके काम करने के घंटे गिनी नहीं जाती डॉक्टर को ठीक से आराम नहीं मिलता
डॉक्टर सूरज कुमार सिमलिया गांव के बच्चे और स्कूल के टीचर साथ साथ बच्चों के माता-पिता ने डॉक्टर सूरज कुमार बहुत शुक्रगुजार कीया डॉक्टर एक भगवान का दूसरा स्वरूप होता है
रिपोर्टर : दिलीप परमार
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