"सड़क दुर्घटनाएं ईश्वर की मर्जी नहीं, मानवीय चूक" जस्टिस श्री अभय मनोहर सप्रे 'डेथ रिव्यू करने'
सागर - जिले में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली जनहानि को की समीक्षा हेतु जिला कलेक्टर कार्यालय सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्री अभय मनोहर सप्रे ने की। बैठक में कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल, पुलिस अधीक्षक श्री अनुराग सुजानिया, नगर निगम कमिश्नर श्री राजकुमार खत्री, सिटी मजिस्ट्रेट श्री गगन बिसेन, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी श्री मनोज तेनगुरिया, लोक निर्माण विभाग एसडीओ श्री साहित्य तिवारी सहित एनएचएआई, एमपीआरडीसी सहित अन्य रोड एजेंसी के जिलाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति श्री अभय मनोहर सप्रे ने स्पष्ट किया कि समिति का मुख्य ध्येय सड़क हादसों को नियंत्रित कर मौतों का आंकड़ा शून्य पर लाना है। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाएं ईश्वर की मर्जी नहीं बल्कि मानवीय एवं तकनीकी त्रुटियों का परिणाम हैं, जिन्हें सही प्रबंधन से रोका जा सकता है। उन्होंने सागर को पूरे प्रदेश एवं देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित करने का आह्वान किया।
न्यायमूर्ति श्री अभय मनोहर सप्रे द्वारा समीक्षा में पाया गया कि जिले के चिन्हित दुर्घटना संभावित स्थलों (ब्लैक स्पॉट्स) पर किए गए सुधारात्मक कार्यों के सकारात्मक परिणाम भी प्राप्त हुए हैं, जिससे अनेक क्षेत्रों में जनहानि एवं दुर्घटना दरों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने शेष चिन्हित स्थलों पर अवसंरचनात्मक सुधार कार्यों को निरंतर जारी रखने तथा उनके प्रभाव का नियमित मूल्यांकन करने के निर्देश दिए।
चालानी कार्रवाई में वृद्धि के बावजूद आमजन द्वारा दोपहिया वाहनों पर हेलमेट एवं चार पहिया वाहनों में सीट बेल्ट के उपयोग की स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई। इस संबंध में निर्देशित किया गया कि केवल वैधानिक दंडात्मक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है; अतः सुरक्षा उपकरणों के प्रयोग को दैनिक व्यवहार में समाविष्ट करने हेतु अंतर-विभागीय समन्वय के साथ विशेष अभियान संचालित किए जाएं। सड़क निर्माण एवं रखरखाव से संबंधित सभी कार्यकारी एजेंसियों को सड़क सुरक्षा मानकों के सख्त अनुपालन हेतु निर्देशित किया गया है।
समस्त सड़कों के गड्डों का सर्वे एवं उनकी मरम्मत/भराव का कार्य तत्काल प्रभाव से प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए। इसी प्रकार भविष्य में स्वीकृत/निर्माणाधीन सड़क परियोजनाओं में गुणवत्ता नियंत्रण तथा ऐसी त्रुटिहीन डिजाइन संरचना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, जिससे ब्लैक स्पॉट्स की पुनरावृत्ति न हो। न्यायमूर्ति श्री स्प्रे ने सड़क सुरक्षा को केवल प्रशासनिक दायित्व न मानते हुए इसे जन-आंदोलन का रूप दिए जाने पर बल दिया। संबंधित विभागों, शैक्षणिक संस्थानों एवं सामाजिक संगठनों के सहयोग से नागरिकों, विशेषकर युवाओं को यातायात नियमों के अनिवार्य अनुपालन हेतु प्रेरित करने तथा जमीनी स्तर पर जागरूकता गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए।
संवेदनशील स्थलों (Crash Prone Locations) पर त्वरित सुधार
सेवलाइफ फाउंडेशन द्वारा सागर जिले में चिन्हित 152 दुर्घटना संभावित स्थलों एवं नेशनल हाईवे (NH-44) पर स्थित ब्लैक स्पॉट्स के सुधार हेतु संबंधित विभागों को तुरंत इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। उल्लेखनीय है कि राज्य के 6 अति-संवेदनशील जिलों (सागर, धार, सतना, रीवा, जबलपुर और खरगोन) में यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
'नो हेलमेट - नो अटेंडेंस' और 'नो हेलमेट नो फ्यूल' का दिया सुझाव
जिले के सभी शासकीय कर्मचारियों के लिए दुपहिया वाहन पर हेलमेट अनिवार्य करने और बिना हेलमेट आने पर कार्यस्थल पर उपस्थिति दर्ज नहीं करने का सुझाव भी बैठक में दिया गया। इसी प्रकार आगामी 2 माह में जिले के पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट पेट्रोल न देने के नियम को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई। इन सुझावों का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और जन सामान्य में सड़क सुरक्षा संबंधी मानकों को व्यावहारिक रूप से उनकी जीवन शैली में शामिल कराना है।
डेथ रिव्यू कमिटी होगी गठित; अवैध मीडियन कट पर होगी एफआईआरः
बैठक में कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने कहा कि राजमार्गों पर बिना स्वीकृति अनधिकृत मीडियन कट बनाने वालों के विरुद्ध सीधे एफआईआर दर्ज की जाएगी। शराब पीकर वाहन चलाने (Drink and Drive) वालों के खिलाफ ब्रेथ एनालाइजर से निरंतर चेकिंग, ओवरस्पीडिंग, ओवरलोडिंग पर नकेल कसने तथा सड़कों के गड्डों को तत्काल भरने के निर्देश दिए गए। दुर्घटना पीड़ितों को 'गोल्डन आवर' में त्वरित उपचार उपलब्ध कराने हेतु एम्बुलेंस के रिस्पॉन्स टाइम को कम से कम करने का निर्देश दिया गया।
कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने कहा कि जिले में होने वाली प्रत्येक घातक सड़क दुर्घटना के गहन डेटा एनालिसिस के लिए 'डेथ रिव्यू कमेटी' का गठन किया जाएगा, जो दुर्घटना के कारण, समय, स्थान, वाहन के प्रकार, हेलमेट/सीटबेल्ट के उपयोग आदि का सटीक विश्लेषण करेगी।
आम नागरिकों से अपीलः
प्रशासन ने जिले के समस्त नागरिकों से अपील की है कि वे दोपहिया वाहन चलाते समय मानक (ISI) हेलमेट एवं चार पहिया वाहन में सीटबेल्ट का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें, ओवरस्पीडिंग न करें तथा यातायात नियमों का पालन कर जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाएं।
रिपोर्टर - लाल साहब लोधी
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