अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर बाल विवाह मुक्ति रथ का समापन
सहरसा : भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर चले 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान के तहत मधेपुरा जिले के गांव कस्बों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहे बाल विवाह मुक्ति रथ की यात्रा के समापन के अवसर पर एक कार्यक्रम में लोक भारती सेवा आश्रम ने कहा कि हमारे प्रयासों को मिली प्रतिक्रिया से हम आश्वस्त हैं कि बाल विवाह मुक्त मधेपुरा और बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करने के बेहद करीब हैं। लोक भारती सेवा आश्रम बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए जमीन पर काम कर रहे 250 से भी ज्यादा नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन का सहयोगी संगठन है।02 फरवरी, 2026 को जिले में बाल विवाह मुक्ति रख को सचिव,जिला विधिक सेवा प्राधिकार मधेपुरा,जिला कार्यक्रम पदाधिकारी,आईसीडीएस,अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति एवं अन्य पदाधिकारीयों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इन 30 दिनों में बाल विवाह मुक्ति रथ जिले में 1350 किलोमीटर यात्रा की । यह रथ 180 गांव तक पहुंचा और 70000 से भी अधिक लोगों को बाल विवाह के खिलाफ अभियान से जोड़ा। 'बाल विवाह मुक्त भारत' अभियान के साल भर पूरा होने के अवसर पर भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 4 दिसंबर 2025 को देशव्यापी 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान का ऐलान किया था। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के सहयोगी संगठनों ने इस अभियान की मोर्चे से अगुवाई करते हुए देश के 439 जिलों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता का संदेश देने के लिए "बाल विवाह मुक्ति रथ" निकाले। इस रथ ने जिले के तमाम गांव और कस्बों में घूम-घूम कर लोगों को बाल विवाह के स्वास्थ्य शिक्षा व आजीविका पर दुष्परिणामों से अवगत कराया और इसके कानूनी पहलुओं की जानकारी देते हुए समझाया कि बाल विवाह दंडनीय अपराध है। प्रमुख सड़कों और बेहतर पहुंच वाले मार्गो से बाल विवाह मुक्ति रथ गुजरे जबकि संपर्क के लिहाज से मुश्किल सुदूर गांवों तक मोटरसाइकिल व साइकिल कारवां के जरिए पहुंचा गया ताकि बाल विवाह मुक्त मधेपुरा का संदेश सबसे आखिरी छोर तक पहुंच सके।लोक भारती सेवा आश्रम के संस्थापक पंचम नारायण सिंह ने बाल विवाह के खिलाफ इस 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान और इसके तहत निकाले गए 'बाल विवाह मुक्ति रथ' को परिवर्तनकारी बताते हुए कहा,"यह कोई प्रतीकात्मक यात्रा नहीं थी। यह पहियों पर बदलाव का संदेश था जिसे लोगों ने स्वीकार किया और सराहा। अब लगभग पूरी सभ्य दुनिया ने हमारी यह बात मान ली है कि बाल विवाह कोई सामाजिक को कुप्रथा नहीं बल्कि विवाह की आड़ में बच्चों से बलात्कार है। यह एक अपराध है और कानूनन दंडनीय है। बाल विवाह किसी भी बच्ची के जीवन के पुष्पित पल्लवित होने की संभावनाओं को ही खत्म कर देता है और बच्चियों को कुपोषण,अशिक्षा व गरीबी के दुष्चक्र में धकेल देता है"। उन्होंने कहा कि सरकार,प्रशासन व जन प्रतिनिधियों की भागीदारी से यह अभियान एक व्यापक जन भागीदारी वाले जन अभियान में तब्दील हो गया। सभी के सहयोग से बाल विवाह के खात्मे के लिए कानून,सुरक्षा और जवाबदेही के संकल्प को हम जन समुदाय तक ले गए ताकि बाल विवाह मुक्त मधेपुरा का लक्ष्य वास्तविकता में बदल सके।
रिपोर्टर : अजय कुमार

No Previous Comments found.