उत्तर बिहार की जीवन रेखा है तिलावे नदी : ओम प्रकाश भारती
सहरसा : नदी मित्र इकाई, सहरसा द्वारा सत्तर कटैया प्रखंड के मनखाही गांव के पास तिलावे नदी के किनारे नदी संवाद का आयोजन रविवार को किया गया। नदी संवाद में लुप्त हो रही तिलावे नदी के पुनरुद्धार पर परिचर्चा आयोजित की गयी। मुख्य वक्ता नदी मित्र ओम प्रकाश भारती ने कहा तिलावे उत्तर बिहार की जीवन रेखा है। नेपाल की तराई से निकल कर सुपौल, सहरसा, मधेपुरा जिले होते हुए लगभग चौरासी किलोमीटर दूरी तय करने के बाद खगड़िया जिले में कोसी में समाहित हो जाती है। वर्षों से इस नदी के का उपयोग कृषि और पशुपालन के होता रहा है।1934 तक यह कोसी का प्रवाह मार्ग रही है, भूकंप के बाद कोसी का प्रवाह मार्ग बदल गया। आज इसकी धारा लुप्त प्राय है। 2025 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सहरसा में प्रगति यात्रा के दौरान नदी का निरीक्षण किया और गाद निकासी, सिंचाई बढ़ाने व बाढ़ नियंत्रण के निर्देश दिए।नदी मित्र भारती ने कहा कि तिलावे अतिक्रमण के कारण लुप्त हो रही हैं। तिलावे के प्रवाह क्षेत्र की अधिकांश ज़मीन किसान और रैयतों की है। उच्च मार्ग (हाइवे), रेलवे, उद्योग के लिए ज़मीन अधिग्रहण करने की नीति, योजना तथा अभ्यास है आपके पास, तो इन छोटी नदियों के लिए क्यों नहीं? छोटी नदियां बड़ी नदियों का आधार है। वे भी संस्कृति के प्रवाह हैं, जीवनदायिनी है। छोटे लोगों की उपेक्षा तो करते रहिए, मानव है संघर्ष उनकी नियति है। नदियां तो निर्जीव है, चल फिर तो सकती है, लेकिन कानूनी लड़ाई नहीं लड़ सकती, कोर्ट कचहरी नहीं जा सकती। उसके लिए लड़ना तो समाज को ही होगा। भारत में नदियों से संबंधित कानून मुख्य रूप से जल विवाद निपटान, प्रदूषण नियंत्रण, और संरक्षण पर केंद्रित हैं। अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 और नदी बोर्ड अधिनियम, 1956 प्रमुख हैं, लेकिन उनकी प्रभावशीलता सीमित रही है। नदियों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए एक एकीकृत “नदी अधिनियम” की आवश्यकता महसूस की जा रही है ।बिहार सरकार ने तिलावे नदी के पुनरुद्धार के लिए महत्वपूर्ण योजना बनाई। नदी की उड़ाही करवाया, कुछ जगहों पर कार्य भी हुए। लेकिन गाद भरना तिलावे की समस्या नहीं है, मुख्य समस्या है अतिक्रमण। जब तक उद्गम से कोसी में समाहित होने तक , नदी के वहन क्षेत्र को अतिक्रमण से मुक्त नहीं नहीं कराया जाएगा, तब तक इसका पुनरुद्धार संभव नहीं है। लौकहा, बैजनाथपुर, सौर बाजार क्षेत्र में शहरीकरण के कारण नदी के वहन क्षेत्र में घर बना दिए गए हैं। इसके लिए सरकार के साथ समाज को साथ आना होगा।
रिपोर्टर : अजय कुमार

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