संत लक्ष्मीनाथ गोसाई महोत्सव में सिद्ध वीणा वादन व बाबाजी रचित गीत भजन से कार्यक्रम संपन्न

सहरसा : कला संस्कृति विभाग बिहार एवं जिला प्रशासन सहरसा के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को प्रेक्षागृह में महान सिद्ध संत परमहंस लक्ष्मीनाथ गोसाई महोत्सव का आयोजन किया गया।इस अवसर पर एडीएम निशांत,जिला कला संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा झा,नंद शंकर झा,भरत झा,निर्मल मिश्र,बेचन पोद्दार,कुमोदानंद झा,ब्रजेश कुमार सहित अन्य लोगों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया।कार्यक्रम का संचालन आनंद झा एवं स्वागत भाषण जिला कला संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा झा के द्वारा किया गया।इस अवसर पर एडीएम निशांत ने कहा कि लक्ष्मीनाथ गोसाई महोत्सव एक ऐसा कार्यक्रम है। जिसमें शास्त्रीय संगीत की सभी विधाओं को प्रोत्साहित करने के लिए सिद्धहस्त कलाकारों को आमंत्रित किया गया है। सिद्ध वीणा वादक सिद्धार्थ बनर्जी प्रधानमंत्री के साथ विभिन्न कार्यक्रम में अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।अगली बार इस महोत्सव के लिए बनारस घराने से अच्छी ध्रुपद गायक को आमंत्रित किया जाएगा।जिला कला संस्कृति पदाधिकारी ने कहा कि इस महोत्सव के माध्यम से संत लक्ष्मी नाथ गोसाई के व्यक्तित्व एवं कृतित्व के एवं के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु प्रयास किया जा रहा हैं। इस कड़ी में बाबाजी लिखित व रचित भजन कीर्तन एवं गीत का गायन कर स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।स्थानीय कलाकारों द्वारा संत लक्ष्मी नाथ गोसाई उर्फ बाबा जी रचित विभिन्न भजनों का की शानदार प्रस्तुति की गई।वही वीणा वादक सिद्धार्थ बनर्जी ने कहा कि संगीत एवं सिद्ध वीणा माँ सरस्वती के इस अनोखा वाद्य यंत्र का मै सेवक हूं। अपने जीवन के माध्यम से इसकी सेवा करने की कोशिश कर रहा हूं। मेरे रूप चाहे जो भी हो चाहे कभी कलाकार गुरु या टीचर या कभी कंपोजर के रूप में हो निरंतर सेवा देते आ रहा हूं। आज बाबा जी के चरणों में मुझे भी हाजिरी लगाने का मौका मिला है इसके लिए मैं जिला प्रशासन का आभारी हूं।सिद्धार्थ बनर्जी द्वारा राग यमन जिसे शास्त्रीय जिसका शास्त्रीय नाम राग कल्याण है जो शिवजी के चरणों में समर्पित हैं। इसके साथ ही ध्रुपद, तीन ताल, भजन, जय जय भैरवी,वैष्णव जन ते ने कहिए पीर पराई जानी रे जैसे धुन पर मधुर वीणा वादन कर लोगों को मंत्र मुक्त कर दिया। वही इस अवसर पर प्रसिद्ध गायक नंद शंकर झा द्वारा बाबा जी रचित भजन सबके सरस राम के नाम, भजन करू निरंतर आठो याम,बेचन पोद्दार द्वारा गुरू व्दना प्रथम देव गुरुदेव जगत में, और न कोई दूजा, जिला स्नेहा झा के द्वारा कब अइहै रघुनाथ प्रिय मम सीता पति हितकारी, सबरी शगुन विचार विचारी एवं गजल तथा सुचित्रा मिश्रा के द्वारा बाबाजी की लिखित मोहन बिनु कौन चरैया गैया का सुमधुर गायन किया गया। वही बृजेश कुमार द्वारा सूफी गीत मैं तो एक हवा हूं मुझे ढूंढ ना पाओगे वहीं भारत झा के द्वारा सीताराम सुमित्रानंदन आये सरजू तीर रे जैसे भजन पर शानदार प्रस्तुति की गई इस मौके पर सभी कलाकार एवं वाद्य यंत्र वादको को पाग चादर एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

रिपोर्टर : अजय कुमार

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