सिमरी बख्तियारपुर नगर परिषद में 'लाइट' घोटाला, सहरसा का काम और कागजों पर जिला 'मधेपुरा', ₹1.65 करोड़ की योजना में मची लूट

सहरसा : जिले के नगर परिषद सिमरी बख्तियारपुर में विकास के नाम पर सरकारी खजाने की लूट का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। GeM पोर्टल के माध्यम से लगाए गए 400 डेकोरेटिव लाइट पोल योजना में न केवल तकनीकी मानकों की धज्जियां उड़ाई गई हैं, बल्कि सरकारी दस्तावेजों में भी भारी हेरफेर का खुलासा हुआ है। लगभग ₹1,65,60,000 (एक करोड़ पैंसठ लाख साठ हजार) की इस योजना में संवेदक और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से जनता की गाढ़ी कमाई की बंदरबांट की जा रही है।​कागजों पर 'मधेपुरा' में है सिमरी बख्तियारपुर.​हैरानी की बात यह है कि GeM कॉन्ट्रैक्ट (GEMC-511687799880145) में विभाग का नाम तो 'नगर परिषद सिमरी बख्तियारपुर' दर्ज है, लेकिन पते के कॉलम में जिला 'मधेपुरा' अंकित किया गया है। सवाल यह उठता है कि सहरसा जिले के निकाय का कार्य दूसरे जिले के पते पर कैसे आवंटित हो गया.क्या यह किसी बड़ी साजिश या वित्तीय जालसाजी का हिस्सा है, जिसे अधिकारियों ने जानबूझकर नजरअंदाज किया.​बिना नींव के खड़े किए पोल, हल्की हवा में गिर रहे 'करोड़पति' खंभे ​धरातल पर योजना की स्थिति और भी भयावह है। अनुबंध के अनुसार, इन भारी-भरकम डेकोरेटिव पोल के लिए मजबूत कंक्रीट फाउंडेशन (Base) बनाना अनिवार्य था। लेकिन संवेदक 'इशान ट्रेडर्स' ने मानकों को ताक पर रखकर पोल को महज मिट्टी में धंसा दिया है। आलम यह है कि सामान्य हवा चलने पर भी ये पोल ताश के पत्तों की तरह जमीन पर गिर रहे हैं। इससे न केवल सरकारी संपत्ति का नुकसान हो रहा है, बल्कि राहगीरों की जान पर भी हर वक्त खतरा मंडरा रहा है।​विभागीय चुप्पी और भ्रष्टाचार की बू ​इस पूरे प्रकरण में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (EO), कनीय अभियंता (JE) और लेखापाल की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। बिना भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किए और दस्तावेजों में जिले की इतनी बड़ी गलती के बावजूद भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ना विभाग की मिलीभगत की ओर इशारा करता है। स्थानीय युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में SDO और DM को आवेदन सौंपकर उच्च स्तरीय जांच और FIR दर्ज करने की मांग की है।

​प्रमुख आपत्तियां:
​अनब्रैंडेड सामग्री: ब्रैंडेड कंपनियों को छोड़कर 'Unbranded' श्रेणी के घटिया पोल ऊँचे दामों पर खरीदे गए।​सुरक्षा में चूक: गिरे हुए पोल और खुली बिजली की तारें कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती हैं।​फर्जीवाड़ा: गलत पते वाले कॉन्ट्रैक्ट पर अधिकारियों के हस्ताक्षर होना बड़ी लापरवाही है।​अब देखना यह है कि प्रशासन इस 'लाइट घोटाले' पर क्या कार्रवाई करता है या फिर करोड़ों की यह लूट फाइलों में ही दफन हो जाएगी।

रिपोर्टर : अजय कुमार

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