संवैधानिक अधिकार परिसीमन सुधार अभियान को संसद में विरोध कर रोक देना जनविरोधी कदम
सहरसा : राष्ट्रीय लोक मोर्चा जिला संयोजक अर्चना आनन्द ने अपनी पार्टी द्वारा चलाए जा रहे संवैधानिक अधिकार परिसीमन सुधार अभियान को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही विपक्षी दलों द्वारा संसद में विरोध कर रोक देना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं जनविरोधी कदम है। यदि यह महत्वपूर्ण विधेयक कानून का रूप लेता तो बिहार के साथ-साथ भारत में भी लोकसभा एवं विधानसभा क्षेत्रों के बेहतर संतुलन और प्रतिनिधित्व का मार्ग प्रशस्त होता। विशेष रूप से बिहार में लोकसभा क्षेत्रों की संख्या 40 से बढ़कर 60 तथा विधानसभा क्षेत्रों की संख्या 243 से बढ़कर 365 हो जाती, जिससे राज्य के लोगों को सशक्त प्रतिनिधित्व मिलता।यह संघर्ष केवल संख्या बढ़ाने का नहीं, बल्कि बिहार और भारत के संवैधानिक अधिकारों, समान राजनीतिक भागीदारी और संतुलित विकास की लड़ाई है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा हमेशा से इन मुद्दों को मजबूती से उठाता रहा है।मैं इस महत्वपूर्ण पहल के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा सहित एनडीए के सभी सम्मानित नेताओं का हृदय से आभार व्यक्त करती हूं, जिन्होंने इस विषय को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाया।साथ ही मैं विपक्षी दलों के इस राज्य विरोधी एवं महिला विरोधी रवैये की घोर निंदा करती हूं। यह कदम बिहार और देश की जनता के अधिकारों के साथ सीधा अन्याय है, जिसे जनता कभी माफ नहीं करेगी।राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व में पार्टी निरंतर बिहार और भारत के हक, सम्मान और मजबूत लोकतंत्र के लिए संघर्षरत है। उनके दूरदर्शी नेतृत्व में यह अभियान जन-जन तक पहुंचा और लोगों में व्यापक जागरूकता आई।बिहार और देश की जागरूक जनता आने वाले समय में ऐसे जनविरोधी निर्णय लेने वाले दलों को करारा जवाब देगी।
रिपोर्टर : अजय कुमार

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