शहर में श्रद्धा व गरिमा के साथ मनाई गई दानवीर भामाशाह की जयंती
सहरसा : शहर के वार्ड संख्या 39 स्थित तैलिक वैश्य साहु भवन में महान दानवीर भामाशाह की जयंती श्रद्धा, उत्साह और गरिमा के साथ मनाई गई। समारोह में बड़ी संख्या में समाज के प्रबुद्ध जन, गणमान्य नागरिक एवं युवा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसके पश्चात अतिथियों ने भामाशाह के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके त्याग, समर्पण और दानशीलता को नमन किया। पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति और प्रेरणा से ओत-प्रोत नजर आया।
समारोह की अध्यक्षता सेवानिवृत्त शाखा प्रबंधक राजेन्द्र साहू ने की, जबकि संचालन जदयू नेता देवेंद्र कुमार देव ने प्रभावी ढंग से किया। वहीं भाजपा जिला उपाध्यक्ष राजीव रंजन साह ने सभी आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया।जंयती समारोह की अध्यक्षता कर रहे वरीय शाखा प्रबंधक राजेंद्र साहू ने अपने संबोधन में कहा कि भामाशाह का नाम भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नीरज गुप्ता ने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध के बाद जब महाराणा प्रताप आर्थिक संकट और कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे थे, तब भामाशाह ने अपनी जीवन भर की संपूर्ण कमाई उन्हें समर्पित कर दी।
डाक्टर विमल कुमार एवं डाक्टर अशोक गुप्ता कहा कि भामाशाह के दिए धन से महाराणा प्रताप ने पुनः लगभग 25,000 सैनिकों की सेना तैयार की और मुगलों का डटकर सामना किया।प्रोफेसर चंद्रेश्वरी शाह , अवकाश प्राप्त जिला पशुपालन पदाधिकारी वीरेंद्र साह ने कहा कि भामाशाह का यह योगदान केवल आर्थिक सहयोग नहीं था, बल्कि यह राष्ट्रभक्ति, निष्ठा और त्याग का अनुपम उदाहरण था।रालोमो नेता चंदन बंगाची एवं शिक्षाविद् वीरेंद्र साहा ने कहा कि उस कठिन दौर में जब महाराणा प्रताप अपने परिवार के साथ जंगलों और पहाड़ियों में संघर्ष कर रहे थे, तब भामाशाह ने बिना किसी स्वार्थ के अपना सर्वस्व अर्पित कर मेवाड़ की अस्मिता और स्वाभिमान को बचाने में निर्णायक भूमिका निभाई।संचालन कर रहे महिषी विधानसभा के जदयू नेता देवेंद्र कुमार देव ने अपने विचार व्यक्त करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भामाशाह जैसे महापुरुष सदियों में एक बार जन्म लेते हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए त्याग और समर्पण सर्वोपरि होना चाहिए।भाजपा उपाध्यक्ष राजीव रंजन साह ने कहा कि भामाशाह के अद्वितीय दान और बलिदान के कारण ही उन्हें इतिहास के महानतम दानवीरों में गिना जाता है।
समारोह के दौरान भामाशाह के सम्मान में प्रेरणादायक पंक्तियाँ भी प्रस्तुत की गईं। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने भामाशाह के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने और समाज में सेवा, त्याग एवं सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। समारोह में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, बुद्धिजीवी एवं स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे पूरा आयोजन अत्यंत सफल एवं प्रेरणादायक बन गया।
इस जंयती समारोह के अंत में तैलिक समाज के जिलाध्यक्ष पद पर लम्बे समय तक रहे श्री कामेश्वर साह जी एवं पूर्व वार्ड पार्षद सुभकलाल साह जी के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित किया गया।
रिपोर्टर : अजय कुमार

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