सुहागिनो के लिये सौभाग्य प्रदान करने वाला पर्व वट सावित्री 16 मई शनिवार को : पंडित तरुण झा

सहरसा : ब्रज किशोर फाउंडेशन एवं ज्योतिष संस्थान डॉ० रहमान चौक सहरसा के संस्थापक ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा जी ने बताया कि ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को वट सावित्री का व्रत रखा जाता है,सुहागिन महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं,माना जाता है कि पौराणिक समय में सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लाने के लिए यह व्रत रखा था,मिथिला में विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार,अखंड सौभाग्य प्रदान करने वाला वट सावित्री व्रत 16 मई शनिवार को है,वट सावित्री का व्रत सौभाग्य प्राप्ति के लिए किया जाता है,वट वृक्ष का पूजन एवं सावित्री-सत्यवान की कथा का स्मरण करने के विधान के कारण ही यह व्रत वट सावित्री के नाम से प्रसिद्ध हुआ,धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,वट वृक्ष को देव वृक्ष माना गया है, वट वृक्ष की पूजा कर महिलाएं देवी सावित्री के त्याग, पति प्रेम एवं पति व्रत धर्म का स्मरण करती हैं,व्रत स्त्रियों के लिए सौभाग्य वर्धक प्रदान करने वाला होता है।

नवविवाहितों को करनी होती है विशेष पूजा :-

पहली बार व्रत करने वाली नवविवाहितों को विशेष पूजा-अर्चना करने की मान्यता है,पंडित तरुण झा जी ने बताया कि पहली बार व्रत करने वाली नवविवाहिता  स्नान के उपरांत नया वस्त्र धारण कर श्रृंगार करती है।तत्पश्चात वट के पेड़ की पूजा हेतु निकलती है, उनके पीछे दर्जनों महिलाएं पारम्परिक गीत गाती हुई वट वृक्ष तक साथ चलतीं हैं,साथ ही सुहागिन महिलाएं कच्चे धागे से वृक्ष को बांधती हैं,वृक्ष के नीचे फल, पकवान रखकर वट सावित्री की पूजा,कथा कही और सुनी जाती हैं।

रिपोर्टर : अजय कुमार

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