संत सदगुरु महर्षि मेंहीं जी महाराज की 142वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई
सहरसा : बीसवीं सदी के महान संत सदगुरु महर्षि मेंहीं जी महाराज की 142वीं जयंती गुरुवार को गांधी पथ एवं पटेल नगर स्थित संतमत सत्संग मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर पूरे नगर में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह नजर आया।कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः काल प्रभात फेरी के साथ हुई। गाजे-बाजे और भजन-कीर्तन के साथ निकली यह शोभायात्रा गांधी पथ मंदिर से प्रारंभ होकर वीर कुंवर सिंह चौक, थाना चौक, पंचवटी, मीरा सिनेमा रोड और बस स्टैंड होते हुए पुनः मंदिर परिसर पहुंची। यात्रा के दौरान श्रद्धालु महर्षि मेंहीं जी के जयकारे लगाते हुए भक्ति में लीन दिखाई दिए।मंदिर परिसर में जयंती के अवसर पर विशेष सत्संग, भजन-कीर्तन और गुरु महिमा का गुणगान किया गया। संतमत के अनुयायियों ने ध्यान और साधना, विशेषकर “शब्द साधना” पर जोर देते हुए आध्यात्मिक उन्नति का संदेश दिया।इस अवसर पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए स्वामी महेशानंद जी महाराज ने कहा कि सदगुरु महर्षि मेंहीं परमहंस 20वीं सदी के महान संत, दार्शनिक और संतमत के प्रमुख प्रवर्तक थे। उन्होंने बिहार के भागलपुर स्थित कुप्पाघाट में रहकर आध्यात्मिक ज्ञान का व्यापक प्रचार-प्रसार किया। उनका जन्म वैशाख शुक्ल चतुर्दशी, सन 1885 को मधेपुरा जिले के खोखसी श्याम गांव में हुआ था। उनका प्रारंभिक नाम रामानुग्रह लाल दास था, जो आगे चलकर ‘मेहीं’ नाम से विख्यात हुए।उन्होंने वर्ष 1909 में बाबा देवी साहब से दीक्षा लेकर कठोर साधना और ध्यान के माध्यम से आत्मज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने “मानसो ध्यान”, “बिंदु ध्यान” और “दृष्टि योग” जैसी साधनाओं के महत्व को बताया और संतमत के सिद्धांतों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया। उनकी रचना‘सत्संग-सुधा-सागर’ आज भी आध्यात्मिक मार्गदर्शन का प्रमुख स्रोत मानी जाती है। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का भी आयोजन किया गया, जो पूरे दिन चलता रहा। बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य अर्जित किया।जयंती समारोह के अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरु के प्रति समर्पण भाव व्यक्त करते हुए मानवता, अहिंसा, शाकाहार और मानसिक शांति के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि संत महर्षि मेंहीं जी के विचारों और शिक्षाओं को आत्मसात करने का प्रेरणादायक अवसर बना।
रिपोर्टर : अजय कुमार

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