Saiyaara Movie Review ....दिल में नहीं, रूह में उतर जाएगी ‘Saiyaara’
कुछ कहानियाँ दिल में उतरती नहीं, रूह में उतर जाती हैं… और ‘सैयारा’ उन्हीं में से एक है। ये सिर्फ एक फिल्म नहीं, एक एहसास है, जो प्यार, दर्द और यादों के धागों से बुना गया है..जी हां ,बॉलीवुड के रोमांस की राजधानी, यशराज बैनर इस बार लेकर आया है एक ताज़ा, मासूम और बेहद संजीदा प्रेम कहानी—‘सैयारा’। निर्देशन की कमान संभाली है मोहित सूरी ने, जो इमोशन्स को पर्दे पर इस तरह उकेरते हैं जैसे कोई शायर कागज़ पर अपनी आखिरी दुआ लिख रहा हो।‘सैयारा’ से बॉलीवुड में दो नए सितारे अपनी उड़ान भरते हैं—अहान पांडे और अनीत पड्डा। और जैसे ही ये फ्रेश जोड़ी परदे पर आती है, लगता है मानो कोई नई सुबह अपनी पहली धूप के साथ दर्शकों का स्वागत कर रही हो।

कहानी घूमती है कृष कपूर (अहान पांडे) और वाणी (अनीत पड्डा) के इर्द-गिर्द। कृष एक स्ट्रगलिंग सिंगर है—उसकी आवाज़ में जादू है, लेकिन किस्मत उसे अब तक पहचान नहीं दे पाई। वहीं वाणी एक राइटर हैं, जो एक टूटी शादी और अधूरी उम्मीदों के बोझ तले खुद को खो चुकी है।

एक दिन वाणी को कृष के साथ काम करने का मौका मिलता है .. दो बिल्कुल अलग-अलग ज़िंदगियाँ, एक टेबल के उस पार आमने-सामने बैठती हैं—और वहीं से एक नई कहानी जन्म लेती है। कृष को अपने सपनों का रास्ता मिलता है, और वाणी को अपनी ज़िंदगी का मकसद। दोनों एक-दूसरे के अधूरेपन को पूरा करने लगते हैं, औरप्यार—धीरे-धीरे, चुपचाप—बढ़ने लगता है।
लेकिन तभी कहानी करवट लेती है। वाणी को कम उम्र में अल्जाइमर होने का पता चलता है। अब सवाल ये है—क्या वाणी की ये बीमारी उनके प्यार को यादों से मिटा देगी? या फिर कृष की मोहब्बत इतनी मजबूत है कि वो भूलती वाणी की यादों को अपनी आवाज़ में कैद कर सकेगा?
वहीं बात करें परफॉरर्मेंस की तो , अहान पांडे, अपने डेब्यू में ही एक बेहद आत्मविश्वासी और इमोशनल परफॉर्मेंस देते हैं। उनकी आंखों में उम्मीद की चमक और सपनों की तड़प साफ़ नज़र आती है।

वहीं अनीत पड्डा, दिल तोड़ने और जोड़ने दोनों में माहिर दिखती हैं। उनके हावभाव, उनकी खामोशियां, और दर्द से लिपटी मुस्कानें सीधे दिल पर असर करती हैं।

इसके अलावा फिल्म का दिल अगर कोई है, तो वो है इसका म्यूजिक। अरिजीत सिंह की आवाज़ जैसे हर सीन में जान डाल देती है। बैकग्राउंड स्कोर भी इमोशनल बीट्स को बेहतरीन तरीके से पकड़ता है। गाने न सिर्फ़ खूबसूरत हैं, बल्कि कहानी को आगे भी बढ़ाते हैं।
कुल मिलाकर:‘सैयारा’ एक ऐसी फिल्म है जो सिर्फ आंखों से नहीं, दिल से देखी जाती है। इसमें सब कुछ है—प्यार, संघर्ष, जुदाई, और एक सवाल जो देर तक मन में गूंजता है: क्या यादें मिट जाएं, तो भी प्यार ज़िंदा रह सकता है?

अगर आप रूमानी कहानियों के दीवाने हैं, अगर आप दिल को छू लेने वाली परफॉर्मेंस देखना चाहते हैं, और अगर आप पहली बार किसी डेब्यू जोड़ी को एक मेच्योर प्रेम कहानी में देखना चाहते हैं—तो ‘सैयारा’ आपके दिल में बैठ सकती है ..

No Previous Comments found.