अलविदा जुमा के मौके पर उमड़ी भारी भीड़, मुस्लिम भाईयों ने पढ़ी नमाज,देश में अमन-शांति के लिए मांगी दुआ
समस्तीपुर : रमजानुल मुबारक माह के आखिरी जुमे के मौके पर प्रखंड के गांवों में मुस्लिम भाईयों ने नमाज पढ़ी और सभी मस्जिदों में अकीदत के साथ नमाज अदा की गई।बच्चे,युवा व बुजुर्ग सभी अकीदतमंदों ने मस्जिदों में नमाज अदा कर अपने गुनाहों की मगफिरत की दुआ मांगी।
साथ ही देश में अमन चैन की दुआएं भी मांगी।
क्या होता है अलविदा जुमा
रमजान के आखिरी जुमे को अलविदा जुमा कहा जाता है। क्योंकि रमजान का ये अखिरी जुमा होता है और इसके साथ ही रहमतों और बरकातों का महीना रमजान हमसे विदा हो जाता है। इस संबंध में आज़ाद इदरीसी ने बताया कि अलविदा के बाद ईद की तैयारियां तेजी के साथ शुरू हो जाती है। अलविदा जुमे की नमाज में उलेमाओं ने लोगों से कहा कि फितरा ईद की नमाज से पहले अदा कर देना चाहिए। वैसे बाद में अदा करने पर पहले फितरा के बदले मिलने वाला सत्तर गुना का सवाब नहीं मिलता। इसलिए लोगों को फितरा जितनी जल्दी हो सके अदा कर दे।
उन्होंने कहा कि जकात का पैसा जरुरतमंदों को ही देना चाहिए। हजरात अपने धन की जकात अदा करे। ईद की नमाज से पहले फित्र अवश्य अदा करें।
अलविदा की नमाज के बाद उलेमाओं ने मांगी अमन चैन की दुआ
समाजसेवी अनवर इक़बाल ने कहा कि अलविदा की नमाज के बाद उलेमाओं ने अमन चैन की दुआएं मांगी। नेक राह पर चलने और गुनाहों से बचने की सीख देने के साथ रमजान का यह महीना अब खत्म होने को है। यह महीना सारे महीनों से ज्यादा मुकद्दस होता है। इसमें गुनाहों की मगफिरत रोजगार में बरकत और जहन्नुम की आग से बचने की दुआ मांगी जाती है और अल्लाह उसको पूरा करता है। इस महीने में खर्च का कोई हिसाब नहीं होता है। जितना खर्च करो ऊपर वाला उतनी ही बरकत देता है। अलविदा की नमाज के साथ लोग ईद की खुशी मनाने की तैयारी कर रहे हैं।
रिपोर्टर - गौतम कुमार सिंह

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