शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति से झंडोत्तोलन तक, विद्यालय प्रबंधन पर सवाल
समस्तीपुर-उजियारपुर : उच्च माध्यमिक विद्यालय चैता दक्षिणी की संचालक पर अर्द्धवार्षिक परीक्षा के संचालन में विभागीय दिशा-निर्देशों की अनदेखी करने, कथित रूप से फर्जी पत्रांक के आधार पर शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति करने तथा वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एक शिक्षक ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर इसकी जानकारी दी है। ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
शिक्षक के अनुसार, जिला शिक्षा पदाधिकारी, समस्तीपुर के आदेश संख्या 601630, दिनांक 10 सितंबर 2026 तथा आदेश संख्या 1942, दिनांक 14 सितंबर 2026 में अर्द्धवार्षिक परीक्षा के संचालन को लेकर एसओपी जारी की गई है। इसके तहत परीक्षा 15 से 20 सितंबर तक आयोजित की जानी थी। परीक्षा में वीक्षण के लिए शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति का अधिकार बीईओ को दिया गया है। एसओपी के बिंदु 11 के अनुसार शिक्षकों की सूची 14 सितंबर तक जिला को भेजी जानी थी। बिंदु 14 में 21 से 25 सितंबर तक मूल्यांकन कार्य बीईओ के स्तर से कराने तथा बिंदु 16 में बीईओ को परीक्षा नियंत्रक बनाए जाने का प्रावधान बताया गया है। वहीं बिंदु 12 और 17 में उत्तर पुस्तिकाओं की गोपनीयता बनाए रखने का निर्देश है।
आरोप है कि इसके बावजूद संचालक की ओर से पत्रांक 02, दिनांक 12 सितंबर 2026 के माध्यम से बिना बीईओ के अनुमोदन के अपने स्तर से 15 से 20 सितंबर तक शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति कर दी गई। इसके बाद पत्रांक 03, दिनांक 17 सितंबर 2026 के जरिए परीक्षा पूरी होने से पहले ही शिक्षकों को विरमित कर मूल विद्यालय भेज दिया गया।
शिक्षक का आरोप है कि इसके बाद विभागीय आदेश के बिना पत्रांक शून्य के माध्यम से 21 से 25 सितंबर तक मूल्यांकन कार्य के लिए शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की गई। इसे एसओपी के प्रावधानों के विपरीत बताते हुए उत्तर पुस्तिकाओं की गोपनीयता और मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं।
वहीं, ग्रामीणों ने 15 अगस्त को हुए झंडोत्तोलन को लेकर भी विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, एक ही परिसर में संचालित दोनों विद्यालयों का झंडोत्तोलन एक साथ करने के बजाय अलग-अलग दो स्थानों पर कराया गया। ग्रामीणों ने इस व्यवस्था को भी जांच के दायरे में शामिल करने की मांग की है।
हालांकि, दस्तावेजों, परीक्षा अभिलेखों और संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों से परीक्षा संचालन, शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति, मूल्यांकन, उत्तर पुस्तिकाओं की गोपनीयता तथा झंडोत्तोलन की व्यवस्था की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने और जांच में दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
रिपोर्टर : प्रवीण प्रकाश
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