शेंदूरवाडा निर्वाचन क्षेत्र में सियासी घमासान, विक्रम राउत, सचिन विधाते और राहुल ढोले के बीच 'त्रिकोणीय' मुकाबला

संभाजीनगर : शेंदूरवाडा जिला परिषद क्षेत्र का चुनाव अब केवल दो पक्षों तक सीमित नहीं रह गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) के विक्रम राउत और भाजपा के सचिन विधाते के बीच सीधी लड़ाई में अब एम.आई.एम. (MIM) की ओर से राहुल ढोले ने ताल ठोक दी है। ढोले के मैदान में उतरने से चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं और अब यहाँ 'कांटे की टक्कर' देखने को मिल रही है।

दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
विक्रम राउत (राष्ट्रवादी - अ.प. गुट):
पानी के संकट के खिलाफ अपनी जान जोखिम में डालने वाले एक 'जुझारू नेता' के रूप में उनकी पहचान है। आम जनता की समस्याओं के लिए संघर्ष और पुराना मजबूत जनसंपर्क उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

सचिन विधाते (भाजपा): सत्ताधारी भाजपा की शक्ति और विकास के मुद्दों को लेकर विधाते मैदान में हैं। उन्होंने इस क्षेत्र में अपनी मजबूत घेराबंदी की है।

राहुल ढोले (MIM): एम.आई.एम. के माध्यम से राहुल ढोले ने चुनाव मैदान में उतरकर स्थापित नेताओं के सामने बड़ी चुनौती पेश की है। युवाओं का साथ और वंचित वर्गों के वोट किसके पक्ष में जाएंगे, इस पर ढोले की जीत टिकी है।

किसका पलड़ा भारी?
राहुल ढोले की उम्मीदवारी से होने वाला मतों का विभाजन किसे फायदा पहुंचाएगा और किसे नुकसान, इसके गणित अब लगाए जा रहे हैं। विक्रम राउत का संघर्षपूर्ण इतिहास, सचिन विधाते की पार्टी घेराबंदी और राहुल ढोले का बढ़ता प्रभाव, इन सबने शेंदूरवाडा के चुनावी नतीजों के प्रति उत्सुकता चरम पर पहुंचा दी है।
पानी, सड़क और विकास ही मुख्य मुद्दे
इस त्रिकोणीय मुकाबले में तीनों उम्मीदवारों ने विकास के दावे किए हैं, लेकिन मतदाता किसके वादों पर भरोसा करेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा। विक्रम राउत ने "मैं पद के लिए नहीं बल्कि हक के लिए लड़ रहा हूँ" कहकर भावनात्मक अपील की है, वहीं ढोले और विधाते ने भी अपने-अपने किले मजबूत करने शुरू कर दिए हैं।

रिपोर्टर : शिवाजी तांबे 

 

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