विधायक प्रशांत बंब गंगापुर तालुका के लिए दुर्भाग्यपूर्ण जनप्रतिनिधि"; कृष्णा पाटील डोणगावकर का जोरदार हमला!
छत्रपति संभाजीनगर - महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले के गंगापुर तालुका में सूखे और जलसंकट की गंभीर स्थिति को देखते हुए विधायक प्रशांत बंब की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में किसानों, पशुओं के चारे और जल नियोजन से जुड़े कई मुद्दे उठाने वाले कृष्णा पाटील डोणगावकर ने बैठक से बाहर आने के बाद पत्रकार परिषद आयोजित कर विधायक प्रशांत बंब पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि विधायक प्रशांत बंब गंगापुर तालुका के लिए दुर्भाग्यपूर्ण जनप्रतिनिधि हैं। आम नागरिकों और अन्य जनप्रतिनिधियों की समस्याएं सुनने की उनमें क्षमता नहीं है। खुद को जलसम्राट समझने वाले विधायक अपनी ही ग्राम पंचायत को ठीक से पानी उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। जल्द ही उन्हें घर बैठने का समय आएगा, ऐसी तीखी टिप्पणी भी उन्होंने की।
डोणगावकर ने बताया कि बैठक में किसानों के पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया था। कृषि महामंडल की सैकड़ों एकड़ जमीन का इस्तेमाल चारा उत्पादन के लिए किया जा सकता है। जायकवाड़ी बांध में पर्याप्त पानी उपलब्ध है। ऐसे में लिफ्ट सिंचाई के माध्यम से पानी उपलब्ध कराकर इस जमीन पर चारा उगाया जा सकता है। इसके बाद तैयार चारा गांव और किसान स्तर पर पशुओं के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए। चारा शिविरों पर अनुदान खर्च करने के बजाय सीधे चारा उत्पादन पर खर्च करना अधिक फायदेमंद होगा। चारा शिविरों के माध्यम से राजनीतिक कार्यकर्ताओं को संभालने के बजाय किसानों के पशुओं को सीधे उनके घर और पशुशालाओं में चारा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए, ऐसी मांग उन्होंने की।
इस दौरान पशुपालन विभाग के अधिकारियों द्वारा कुछ किसानों के चारा फसल उगाने के लिए तैयार होने की जानकारी दिए जाने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जिन किसानों के पास जमीन और पर्याप्त पानी उपलब्ध है, वे फिलहाल प्याज और अन्य नकदी फसलों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं। सूखे की स्थिति में किसान अपनी आर्थिक आमदनी को प्राथमिकता देंगे ही। इसलिए जमीनी हकीकत जाने बिना अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी भ्रामक हो सकती है। अधिकारियों को ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर किसानों की वास्तविक स्थिति समझनी चाहिए।
जायकवाड़ी बांध में पर्याप्त जल भंडारण होने के बावजूद गंगापुर तालुका के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचने का मुद्दा भी उन्होंने उठाया। गांव-गांव और घर-घर तक पानी पहुंचाने वाली योजनाएं अब तक पूरी नहीं हुई हैं। उन्होंने बताया कि सिल्लोड तालुका में खडकपूर्णा बांध से लगभग 200 से 250 गांवों के लिए वाटर ग्रिड का काम अंतिम चरण में बताया जा रहा है। लेकिन गंगापुर तालुका में राइजिंग मेन, जैकवेल और अन्य महत्वपूर्ण कार्य अब भी अधूरे क्यों हैं? जायकवाड़ी का पानी गंगापुर तालुका की जनता तक आखिर कब पहुंचेगा? यह सवाल उन्होंने उठाया। 'हर घर नल से जल' योजना की घोषणाओं और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर होने का आरोप भी उन्होंने लगाया। वितरण व्यवस्था के कार्यों में भ्रष्टाचार होने की बात कहकर मूल जलापूर्ति के मुद्दे से ध्यान भटकाया जा रहा है, ऐसी आलोचना भी उन्होंने की। केवल चर्चा और आश्वासन देने के बजाय परियोजना के महत्वपूर्ण कार्य पूरे कर जनता को पानी उपलब्ध कराया जाए, ऐसी मांग उन्होंने की।
स्वर्गीय साहेबराव पाटील डोणगावकर ने लगभग 30 हजार एकड़ कृषि क्षेत्र को पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उपसा सिंचाई योजनाएं स्थापित की थीं। लेकिन किसानों को इन योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है, ऐसी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने जैकवेल और उपसा सिंचाई योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने की मांग की। पुरानी सिंचाई योजनाएं बंद क्यों हैं और उन्हें दोबारा शुरू करने के लिए अब तक क्या प्रयास किए गए हैं, यह सवाल भी उन्होंने उठाया।
बैठकों की कार्यप्रणाली पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। सुबह से शाम तक बैठकें आयोजित कर अधिकारियों, ग्राम पंचायत सदस्यों और आम नागरिकों को इंतजार कराया जाता है। बड़ी-बड़ी घोषणाएं और चर्चाएं होती हैं, लेकिन वास्तव में इन बैठकों से क्या निर्णय निकलते हैं और उन पर कितना अमल होता है, यह जनता के सामने आना चाहिए। आमसभा हो या जल नियोजन की बैठक, हर बार यही स्थिति देखने को मिलती है। जनप्रतिनिधियों को केवल भाषण देने के बजाय जनता की समस्याएं सुनकर उन पर ठोस निर्णय लेने चाहिए, ऐसा उन्होंने कहा।
गंगापुर तालुका में सरकारी अधिकारियों की मुख्यालय में उपस्थिति का मुद्दा भी उन्होंने उठाया। उनका आरोप है कि कई अधिकारी अपने निर्धारित मुख्यालय में नहीं रहते, जिसके कारण आम नागरिकों को उनसे संपर्क करने में परेशानी होती है। पिछले 12 से 14 वर्षों के राजनीतिक कार्यकाल के बावजूद अधिकारियों के मुख्यालय में रहने का सवाल हल नहीं हुआ है। प्रशासन पर जनप्रतिनिधियों का नियंत्रण है या नहीं और इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है, यह सवाल भी उन्होंने उठाया।
इसके अलावा टेंभापुरी बांध, धामुरी बांध और अन्य छोटे-बड़े बांधों तथा तालाबों में उपलब्ध जल भंडारण का उचित नियोजन करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ किसानों द्वारा नियमों के विरुद्ध पानी का उठाव किया जा रहा है। इससे भविष्य में कुछ गांवों के पेयजल का संकट गंभीर हो सकता है। तहसीलदार और संबंधित प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर अवैध जल निकासी रोकनी चाहिए। कुछ किसानों के व्यक्तिगत फायदे से ज्यादा प्राथमिकता पूरे गांवों के पेयजल को दी जानी चाहिए, ऐसा उन्होंने स्पष्ट किया।
सूखे की समस्या के समाधान में यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधि विफल रहते हैं, तो किसानों के हित में राजनीतिक विरोधी के रूप में सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा, ऐसी चेतावनी कृष्णा पाटील डोणगावकर ने दी। उन्होंने बताया कि कल सांसद की उपस्थिति में होने वाली बैठक में भी किसानों और आम जनता के मुद्दे उठाए जाएंगे। यदि वहां भी इन समस्याओं को नहीं सुना गया, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। ऐसे में गंगापुर तालुका में सूखे, जलसंकट, पशुओं के चारे और सिंचाई योजनाओं को लेकर राजनीतिक संघर्ष और तेज होने की संभावना है।
रिपोर्टर - शिवाजी तांबे

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