सपा नेता के घर क्यों पहुंचे संजय निषाद? 2027 से पहले मुलाकात के मायने क्या हैं?
उत्तर प्रदेश की सियासत में चुनाव से पहले फिर एक ऐसी मुलाकात हुई है, जिसने सियासी गलियारों का तापमान बढ़ा दिया है। जी हां योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के सर्वेसर्वा डॉ. संजय निषाद अचानक समाजवादी पार्टी के बड़े चेहरे और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे के घर पहुँच गए! अब कहने को तो मंत्री जी कह रहे हैं कि ये सिर्फ एक 'शिष्टाचार मुलाकात' थी... लेकिन साहब, यूपी में चुनावों से ठीक पहले इस मुलाकात ने सपा के साथ नए गठबंधन की अटकलों की आग में घी डाल दिया है! ऊपर से संजय निषाद ने बीजेपी को सीधी और खुली चेतावनी दे दी है कि 'अगर बीजेपी ने अपने दरवाजे बंद किए, तो हमें भी आगे के लिए सोचना पड़ेगा!' ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या वाकई एनडीए के इस अहम सहयोगी के बागी तेवर किसी बड़े सियासी भूचाल का इशारा हैं? क्या मंत्री जी पाला बदलने का मन बना चुके हैं? आइए समझते हैं इस पूरी इनसाइड स्टोरी को हमारी इस खास रिपोर्ट में...
दरअसल, लखनऊ में अचानक उस वक्त सियासी पारे का तापमान बढ़ गया, जब यूपी सरकार के मंत्री संजय निषाद सीधे सपा नेता माता प्रसाद पांडे के निजी आवास पर जा पहुँचे। दोनों नेताओं की तस्वीरें सोशल मीडिया पर आईं और चर्चाओं का बाजार गरम हो गया। जिसके बाद संजय निषाद ने सफाई दी कि माता प्रसाद पांडे जी मेरे पुराने साथी और मार्गदर्शक हैं। उनकी तबीयत खराब थी, इसलिए शिष्टाचार के नाते हालचाल जानने गया था। हालांकि भले ही इसे पारिवारिक और शिष्टाचार मुलाकात बताया जा रहा हो, लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि दो दिन पहले ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी माता प्रसाद पांडे का हाल जानने पहुँचे थे।
ऐसे में इस मुलाकात की टाइमिंग को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। क्योंकि एक तरफ संजय निषाद लगातार निषाद समाज को अनुसूचित जाति का दर्जा और 9 फीसदी आरक्षण देने की मांग उठा रहे हैं...दूसरी तरफ गोंडा में व्यापारी विनोद साहनी हत्याकांड को लेकर वो अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ चुके हैं...और अब उन्होंने समाजवादी पार्टी के बड़े नेता माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात की है। इतना ही नहीं...जब उनसे पूछा गया कि क्या 2027 में समाजवादी पार्टी के साथ जा सकते हैं? तो संजय निषाद ने ऐसा जवाब दिया जिसने सियासी चर्चाओं को और हवा दे दी। उन्होंने साफ कहा कि अगर बीजेपी अपने दरवाजे बंद करेगी, तो उन्हें भी आगे के बारे में सोचना पड़ेगा। इतना ही नहीं मंत्री जी ने बीजेपी को नसीहत देते हुए याद दिलाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने निषाद समाज के मुद्दों पर चर्चा नहीं की, जिसका खामियाजा हार के रूप में भुगतना पड़ा। जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में इन मुद्दों पर बात हुई थी और गठबंधन को बंपर जीत मिली थी।
आपको बता दें संजय निषाद की यह नाराजगी सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है, इसके पीछे सीटों का बड़ा गणित और सरकार से कुछ पुरानी तल्खियां भी हैं। संजय निषाद ने बताया कि उनकी बीजेपी के प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह से बातचीत हो चुकी है। उन्होंने साफ कर दिया है कि 2022 में उन्हें 16 सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार वे इससे ज्यादा सीटों की उम्मीद कर रहे हैं। दरअसल, संजय निषाद लगातार निषाद समाज को अनुसूचित जाति में शामिल करने और 9 फीसदी आरक्षण देने की मांग को लेकर मुखर हैं। उनका कहना है कि अगर समाज को उचित सम्मान नहीं मिला तो उनके पास दूसरे विकल्प भी खुले हैं।
वहीं अब सपा के नजरिए से इस पूरे घटनाक्रम को समझे तो, उत्तर प्रदेश की राजनीति में निषाद समाज का चुनावी महत्व लगातार चर्चा में रहा है। पूर्वांचल से लेकर अवध और कई नदी किनारे वाले इलाकों तक निषाद, मल्लाह, केवट, बिंद और दूसरे संबंधित समुदायों का प्रभाव है। ऐसे में अगर संजय निषाद बीजेपी से दूरी बनाते हैं, तो समाजवादी पार्टी के लिए ये एक बड़ा राजनीतिक अवसर हो सकता है। क्योंकि अखिलेश यादव पहले से ही PDA के जरिए अलग-अलग सामाजिक समूहों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में निषाद पार्टी का साथ सपा के सामाजिक समीकरण को एक नया विस्तार दे सकता है। लेकिन अगर सपा संजय निषाद को अपने पाले में लाने की कोशिश करती है तो उसके सामने भी कई सवाल होंगे। जैसे...
सीटों का बंटवारा कैसे होगा?
निषाद पार्टी को कितनी सीटें दी जाएंगी?
क्या संजय निषाद खुद सपा के साथ मंच साझा करेंगे?
और सबसे बड़ा सवाल...क्या निषाद समाज का वोट पूरी तरह पार्टी के साथ ट्रांसफर होगा?
फिलहाल इतना साफ है कि संजय निषाद एनडीए से अलग होने का कोई औपचारिक ऐलान नहीं कर रहे हैं। वो अभी भी बीजेपी के साथ हैं। लेकिन उनके बयान ये बता रहे हैं कि 2027 के चुनाव से पहले वो अपनी पार्टी की राजनीतिक कीमत और बढ़ाना चाहते हैं। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि बीजेपी अपने इस सहयोगी दल को मनाने के लिए क्या कदम उठाती है और क्या संजय निषाद एनडीए के पाले में ही बने रहते हैं या फिर चुनाव से पहले यूपी में कोई नया राजनीतिक धमाका देखने को मिलता है!
No Previous Comments found.