यूपी चुनाव से पहले एनडीए में हलचल तेज, संजय निषाद ने आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी को दी चेतावनी

उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले एक बार फिर सियासी पारा चढ़ गया है। राज्य सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने एनडीए गठबंधन को लेकर एक ऐसा बयान दिया है जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। दिल्ली में पार्टी के एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि निषाद समाज के आरक्षण के पेंडिंग मुद्दे पर सरकार ने जल्द से जल्द कोई ठोस फैसला नहीं लिया, तो उनकी पार्टी के सामने दूसरे रास्ते तलाशने का विकल्प खुला हुआ है। उनके इस तेवर से सत्ताधारी गठबंधन के भीतर असहजता पैदा हो सकती है।

अपने समाज के हक के लिए आवाज उठाना मेरी पहली प्राथमिकता: संजय निषाद

एक मीडिया चैनल से खास बातचीत करते हुए कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने अपने इस तीखे बयान की पूरी सफाई दी और अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि आज वे जिस मुकाम पर हैं, वह पूरी तरह से उनके समाज के समर्थन की वजह से है, इसलिए उनके लिए अपने लोगों की बात उठाना सबसे अहम कर्तव्य है। उन्होंने एक पुराने उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि जब तक बच्चा रोता नहीं है, तब तक मां उसे दूध नहीं पिलाती है। किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ जाने के सवाल पर उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि समय पर सही फैसला नहीं मिला और हक नहीं मिला, तो बच्चे को जीवित रखने के लिए कुछ और करना ही पड़ेगा।

आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी पर सीधा दबाव, कहा- यह कोई भीख नहीं बल्कि अधिकार है

संजय निषाद ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि वे पेशे से एक वकील हैं और अपने समाज के अधिकारों की वकालत करना उनका धर्म है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सवर्ण जातियों और महिलाओं को आरक्षण दिया जा सकता है, तो फिर निषाद समाज के साथ विसंगति क्यों बरती जा रही है। उन्होंने उदाहरण दिया कि दिल्ली के निषाद अनुसूचित वर्ग में आते हैं जबकि उत्तर प्रदेश के निषादों के लिए स्थिति अलग है, जो कि न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से आग्रह किया कि वह अपने ही पुराने वादों और मुद्दों को जल्द सुलझाए, क्योंकि वे कोई भीख नहीं मांग रहे बल्कि अपने संवैधानिक अधिकार की मांग कर रहे हैं।

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