“विकास की टंकी सूखी, जनता की प्यास सच्ची — पहाड़ चिरगा में सरकार की नींद गहरी!”

सरगुजा - जिले के जनपद बतौली के ग्राम पंचायत पहाड़ चिरगा से एक मामला सामने है  कि सरकार के “हर घर नल, हर घर जल” जैसे नारे पहाड़ चिरगा गांव में अब मज़ाक बनकर रह गए हैं। चार साल पहले लाखों रुपये की लागत से बनाई गई टंकी आज भी सूखी खड़ी है —

टंकी में पानी नहीं, नेताओं की बातों में सिर्फ हवा है।

गांव की हकीकत – नाम विकास, काम विनाश!

गांव में लगे हैंडपंप जंग खा चुके हैं।
जहां से पानी निकलता भी है, वह लाल, बदबूदार और दूषित है।

 “सरकार कहती है स्वच्छ पानी मिलेगा,
पर हमारे हैंडपंप से गंदगी निकलती है।
अगर यही पानी विधायक और अफसरों के घर भेज दिया जाए,
तो शायद तब उन्हें हमारी प्यास का मतलब समझ आए।”
— ग्रामीण का कटाक्ष।

चार साल से जनता तरस रही, टंकी बस दीवारों पर टंगी है!

ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के वक्त अधिकारी और ठेकेदार आए,
फोटो खिंचवाई, झंडा लहराया और चले गए —
उस दिन के बाद न टंकी में पानी आया, न नेता गांव लौटे।

> “सरकार ने वादा किया था कि अब हर घर में पानी बहेगा,
लेकिन बहता सिर्फ झूठ है — जो हर चुनाव में दोहराया जाता है।”
— ग्रामीणों की पीड़ा।


विधायक और बड़े नेताओं पर सीधा तंज़:

> “हमारे गांव की टंकी सूख गई,
पर नेताओं की नीयत अब भी गीली है।
चुनाव में वादों का समंदर दिखाते हैं,
और जीत के बाद जनता को रेगिस्तान में छोड़ जाते हैं।”

ग्रामीणों का आरोप है कि विकास का पैसा ऊपर ही गुम हो गया —
गांव तक पहुँची सिर्फ मुनाफे की कहानी, पानी नहीं।


जनता का सवाल सरकार से:

> “जब करोड़ों रुपये जनपद बतौली में आए,
तो पहाड़ चिरगा में एक बूंद क्यों नहीं पहुँची?
क्या टंकी सिर्फ दिखावे के लिए बनी थी,
या भ्रष्टाचार की दीवार खड़ी की गई?”


ग्रामीणों का अल्टीमेटम:

> “अब हमें भाषण नहीं, पानी चाहिए।
विधायक और मंत्री खुद आएं, हैंडपंप का पानी चखें,
तभी समझ आएगा कि जनता के नाम पर कैसे योजनाओं को लूटा गया।”

गांव की आवाज़ गूंज उठी—

> “हमारे बच्चे गंदा पानी पीकर बीमार पड़ते हैं,
और विधायक मंच से कहते हैं — ‘विकास गांव-गांव पहुँचा’।
अगर यही विकास है, तो हमें ऐसा विकास नहीं चाहिए!”


जमीनी हकीकत:

टंकी टूटी, पाइपलाइन जर्जर, हैंडपंप जंग से भरे।
सरपंच और सचिवों के पत्राचार धूल खा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है > 

“सरकार ने हमें नल दिया, पर पानी छीन लिया।
अब हमें योजनाएं नहीं, न्याय चाहिए।”


विधायक रामकुमार टोप्पो का जवाब:

इस मामले पर जब विधायक रामकुमार टोप्पो से बात की गई तो उन्होंने कहा—

“यह समस्या पिछली सरकार के समय की कालाबाजारी का नतीजा है। वर्तमान में मैं स्वयं मॉनिटरिंग कर रहा हूँ कि कहां गड़बड़ी है और असली सच्चाई क्या है। सीतापुर विधानसभा के 21 पंचायतों में पीएचई विभाग को 30 नवंबर तक व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। अगली समीक्षा में जहां भी लापरवाही मिलेगी, वहां जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

उन्होंने जनता से अपील की —

“हर घर नल-जल योजना को सुचारू रूप से चालू करने के लिए मैं पूरी कोशिश कर रहा हूँ।

जनता सहयोग करे ताकि किसी भी गांव में अब प्यास न रहे, सिर्फ पानी बहे।”

अब सवाल सिर्फ पानी का नहीं — जवाबदेही का है।

पहाड़ चिरगा के लोग अब चुप नहीं हैं।
उन्होंने ठान लिया है —
अगली बार नेताओं से वोट नहीं, जवाब माँगेंगे।
क्योंकि टंकी सूखने से पहले, अब जनता का सब्र सूख गया है।

रिपोर्टर - रिंकू सोनी 

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