पंचायतों ने भुलाया अटलजी को,अधूरा अटल चौक बना प्रशासन की कार्यशैली का
सरगुजा - सुशासन दिवस पर सुशासन बेनकाब,देशभर में भारत रत्न,राष्ट्रपुरुष स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती को सुशासन दिवस के रूप में बड़े पैमाने पर मनाया गया,मंच सजे,भाषण हुए,सुशासन के संकल्प दोहराए गए,लेकिन सरगुजा जिले की जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आई,जहां कई ग्राम पंचायतों में न तो अटल जयंती मनाई गई,न ही सुशासन दिवस का कोई औपचारिक आयोजन हुआ। भाजपा शासन के दौरान सामने आई यह स्थिति सरकार के दावों पर सवाल खड़े करती है, खासकर तब, जब स्वयं भाजपा अटल बिहारी वाजपेयी जी के विचारों और नीतियों को अपनी वैचारिक धरोहर बताती रही है, इसके बावजूद पंचायत स्तर पर अटलजी की जयंती तक उपेक्षित रहना कई गंभीर सवालों को जन्म देता है।
सेदम पंचायत में न कार्यक्रम,न श्रद्धांजलि,न जवाबदेही
सबसे गंभीर और चौंकाने वाला मामला ग्राम पंचायत सेदम से सामने आया है,जहां 25 दिसंबर को न कोई श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई, न पंचायत भवन में अटलजी के चित्र पर माल्यार्पण हुआ,न जनप्रतिनिधि नजर आए,न ही प्रशासनिक अमला,सुशासन दिवस पर पूरा गांव सन्नाटे में डूबा रहा। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जब अटलजी को याद करने का अवसर आता है,तब पंचायत स्तर पर पूर्ण उदासीनता दिखाई देती है,जो सीधे तौर पर शासन-प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करती है।
अटल चौक अधूरा,सवाल पूरे
ग्राम सेदम में वर्ष पूर्व स्वीकृत अटल बिहारी वाजपेयी चौक आज तक अधूरा पड़ा हुआ है,नाम राष्ट्रपुरुष का, लेकिन निर्माण कार्य बीच में ही ठप है, न पूर्णता प्रमाण पत्र जारी हुआ,न लोकार्पण की तिथि तय हुई,न ही जनता को यह बताया गया कि निर्माण में देरी क्यों हुई। ग्रामीणों का कहना है कि अटल चौक केवल एक संरचना नहीं,बल्कि अटलजी की विचारधारा और सुशासन के प्रतीक के रूप में स्वीकृत किया गया था,लेकिन आज वही चौक पंचायत और प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक बनकर रह गया है। राशि कहां गई,जिम्मेदार कौन ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से सवाल उठाए हैं कि अटल चौक निर्माण के लिए जो राशि स्वीकृत हुई थी,वह किस मद में खर्च की गई,क्या पूरी राशि आहरित हो चुकी है,यदि हां,तो कार्य अधूरा क्यों है,और यदि नहीं, तो वर्षों से निर्माण लंबित क्यों रखा गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मामले में न पारदर्शिता है,न जानकारी सार्वजनिक की गई है, न ही किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने अब तक जवाबदेही तय करने की कोशिश की है।
सुशासन पर ही सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि जब सुशासन दिवस के दिन ही अटल बिहारी वाजपेयी जी को भुला दिया जाए, और उनके नाम की योजना वर्षों तक अधूरी पड़ी रहे, तो यह सुशासन नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का स्पष्ट उदाहरण है। जांच और कार्रवाई की मांग तेज ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि अटल चौक निर्माण की उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए, निर्माण से जुड़े सभी अभिलेख सार्वजनिक किए जाएं, दोषी अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, तथा अटल चौक का निर्माण कार्य शीघ्र पूर्ण कर विधिवत लोकार्पण किया जाए।
निगाहें प्रशासन पर सुशासन दिवस पर उठे इन सवालों के बाद अब पूरे क्षेत्र की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं, कि वह इस मामले में केवल आश्वासन देता है या वास्तव में कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी अन्य अधूरी योजनाओं की तरह समय के साथ फाइलों में दबा दिया जाएगा। सुशासन दिवस पर यही सबसे बड़ा सवाल है — जब अटल बिहारी वाजपेयी जी ही उपेक्षित हैं, तो सुशासन आखिर किसके लिए?
रिपोर्टर - रिंकू सोनी

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