सरगुजा के जंगलों पर लकड़ी माफियाओं का हमला! NH-43 से यूपी भेजी जा रही लाखों की लकड़ी

सरगुजा के जंगलों पर लकड़ी माफियाओं का हमला! NH-43 से यूपी भेजी जा रही लाखों की लकड़ी, दो ट्रक पकड़े सिस्टम पर उठे बड़े सवाल


बतौली/सीतापुर- सरगुजा जिले में लकड़ी तस्करी का काला कारोबार बेलगाम होता जा रहा है। ताजा मामला विकासखंड बतौली के सीतापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बालमपुर NH-43 मुख्य मार्ग का है, जहां वन विभाग अमले ने मुखबिर की सूचना पर बड़ी कार्रवाई करते हुए लकड़ी से भरे ट्रक समेत दो वाहनों को पकड़ लिया।
मिली जानकारी के अनुसार ट्रक क्रमांक CG15 AC 5275 में इमारती लकड़ी, नीलगिरी और सेमर की लकड़ी भरकर उत्तर प्रदेश भेजने की तैयारी की जा रही थी। जैसे ही वन विभाग और सीतापुर थाना स्टाफ मौके पर पहुंचा, ट्रक चालक मौके से फरार हो गया।
मौके पर दूसरा ट्रक CG15 AC 8712 भी खड़ा मिला, जो खाली था और उसमें लकड़ी भरने की तैयारी चल रही थी। वन विभाग की टीम ने दोनों ट्रकों को जब्त कर सीतापुर ले जाकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
 सीतापुर से मैनपाट-बतौली तक फैला तस्करी का जाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीतापुर, मैनपाट और बतौली क्षेत्र में लंबे समय से लकड़ी माफिया सक्रिय हैं, जो हरे-भरे जंगलों के साथ-साथ किसानों की जमीनों से भी अवैध कटाई करवा रहे हैं।
कई किसानों का कहना है कि उनसे पेड़ कटवाकर पूरा पैसा भी नहीं दिया जाता, और लकड़ी सीधे ट्रकों में भरकर बाहर राज्यों में भेज दी जाती है।
 किसके संरक्षण में चल रहा इतना बड़ा खेल?
ग्रामीणों के अनुसार बाहर से आए कई लोग क्षेत्र में रहकर लकड़ी का अवैध कारोबार चला रहे हैं, लेकिन न तो थानों में उनका मुसाफिर दर्ज होता है और न ही कोई सख्त जांच होती है।
इसी कारण सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में बढ़ती चोरी की घटनाओं को लेकर भी लोगों में शंका बढ़ती जा रही है।
 स्थानीय स्तर पर मिलीभगत की चर्चा
क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोग और कथित नेता लकड़ी माफियाओं के साथ मिलकर इस अवैध कारोबार को संरक्षण दे रहे हैं, जिससे जंगलों की खुलेआम लूट जारी है।

 अब प्रशासन के सामने बड़ी परीक्षा
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सरगुजा के जंगलों से लकड़ी ट्रकों में भरकर दूसरे राज्यों तक कैसे पहुंच रही है?
क्या यह सिर्फ तस्करों का हौसला है या सिस्टम की चुप्पी भी कहीं न कहीं जिम्मेदार है?
अगर समय रहते लकड़ी माफियाओं पर बड़ी और सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो सरगुजा के जंगलों को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
अब देखना यह है कि जब्त ट्रकों की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है या इस पूरे नेटवर्क के पीछे बैठे असली माफियाओं तक कानून का शिकंजा पहुंचता है।

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