शिक्षक द्वारा निजी संस्था के कार्यक्रम की खबर प्रसारित करने पर उठे सवाल

शिक्षक द्वारा निजी संस्था के कार्यक्रम की खबर प्रसारित करने पर उठे सवाल, पत्रकारों में आक्रोश


सरगुजा - विकासखंड बतौली में आयोजित एक निजी समाजसेवी संस्था के आंगनवाड़ी सेमिनार कार्यक्रम को लेकर अब विवाद की स्थिति निर्मित हो गई है। कार्यक्रम के बाद एक शासकीय शिक्षक द्वारा विभिन्न समाचार पत्रों एवं मीडिया प्रतिनिधियों को प्रेस नोट भेजे जाने पर स्थानीय पत्रकारों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। पत्रकारों का कहना है कि बिना धरातलीय सत्यापन एवं वास्तविक स्थिति का अवलोकन किए केवल कागजी उपलब्धियों को प्रचारित किया गया, जो कई सवाल खड़े करता है।
ज्ञात हो कि 13 मई 2026 को बतौली में प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (ECE) विषय पर एक सेमिनार आयोजित किया गया था, जिसमें लगभग 150 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सहभागिता बताई गई। कार्यक्रम में खेल एवं गतिविधि आधारित शिक्षा, सर्कल टाइम, कहानी वाचन, फ्री प्ले और प्रिंट-रिच आंगनवाड़ी जैसे विषयों पर प्रस्तुतियां दी गईं।
हालांकि, इस पूरे आयोजन को लेकर स्थानीय पत्रकारों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि कार्यक्रम में किसी भी पत्रकार को आमंत्रित नहीं किया गया, जिससे वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ सकी। पत्रकारों का आरोप है कि बाद में कार्यक्रम की एकतरफा जानकारी प्रेस विज्ञप्ति के रूप में प्रसारित कर केवल सकारात्मक छवि प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया।
पत्रकारों ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या शिक्षा विभाग किसी शासकीय शिक्षक को यह अधिकार देता है कि वह किसी निजी संस्था अथवा एनजीओ के कार्यक्रम का “पीआरओ” बनकर मीडिया में खबर प्रसारित करे। उनका कहना है कि शासकीय पद पर रहते हुए किसी निजी संस्था के प्रचार-प्रसार में प्रत्यक्ष भूमिका निभाना प्रशासनिक निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
वहीं दूसरी ओर, शिक्षा क्षेत्र में कार्य करने वाली उक्त संस्था द्वारा जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष एवं शिक्षा स्थायी समिति के अध्यक्ष को कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किए जाने को भी लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय लोगों एवं पत्रकारों का कहना है कि यदि कार्यक्रम वास्तव में शिक्षा सुधार एवं जनसहभागिता से जुड़ा था, तो संबंधित जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा समझ से परे है।
पत्रकारों ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम से जुड़े कई तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया तथा जमीनी हकीकत और प्रचारित दावों में अंतर दिखाई देता है। इस पूरे मामले को लेकर पत्रकारों में भारी आक्रोश है और उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
स्थानीय पत्रकारों ने स्पष्ट कहा कि समाचारों का उद्देश्य केवल प्रचार नहीं बल्कि वास्तविकता को जनता के सामने लाना है, और यदि किसी शासकीय कर्मचारी द्वारा निजी संस्थाओं के पक्ष में एकतरफा प्रचार किया जाता है तो यह पत्रकारिता एवं प्रशासनिक मर्यादाओं दोनों के विरुद्ध माना जाएगा।

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