सरोजनीनगर विधानसभा सीट: 2012 से 2022 तक किसे मिले कितने वोट?
लखनऊ की सियासत में एक ऐसी विधानसभा सीट, जहां 2012 में समाजवादी पार्टी ने जीत का परचम लहराया, लेकिन पांच साल बाद ही तस्वीर बदल गई! 2017 में भारतीय जनता पार्टी ने ऐसा दांव चला कि सरोजनीनगर की सीट सपा के हाथ से निकलकर बीजेपी के खाते में पहुंच गई। और फिर आया 2022 का चुनाव, जब बीजेपी ने न सिर्फ अपनी जीत दोहराई, बल्कि जीत का अंतर भी पहले से काफी बढ़ा दिया! जी हां, हम बात कर रहे हैं लखनऊ की सरोजनीनगर विधानसभा सीट की, जहां चुनावी मुकाबले का इतिहास दिलचस्प रहा है। 2012 में सपा के शारदा प्रताप शुक्ला ने जीत दर्ज की, 2017 में बीजेपी की स्वाति सिंह विधायक बनीं और 2022 में बीजेपी ने राजेश्वर सिंह को मैदान में उतारा। राजेश्वर सिंह ने भी जीत दर्ज कर पार्टी का कब्जा बरकरार रखा। लेकिन सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कौन जीता और कौन हारा! असली सवाल है कि आखिर 2012 से 2022 के बीच सरोजनीनगर का चुनावी गणित कैसे बदला? 2012 में जहां जीत का अंतर महज 8 हजार 365 वोट था, वहीं 2017 में यह बढ़कर 34 हजार 179 वोट हो गया। 2022 में बीजेपी की जीत का अंतर 56 हजार 186 वोट तक पहुंच गया। आखिर इन तीन चुनावों में मतदाताओं के फैसले में क्या बदलाव दिखाई दिया? किन प्रत्याशियों के बीच मुकाबला रहा? किस चुनाव में किस पार्टी को कितने वोट मिले? आज हम आपको बताएंगे सरोजनीनगर विधानसभा सीट का पूरा इतिहास। तो आइए, शुरू करते हैं सरोजनीनगर सीट की सियासी कहानी।
सबसे पहले जान लेते हैं सरोजनीनगर विधानसभा सीट की पहचान। लखनऊ जिले की यह विधानसभा सीट संख्या 170 है और सामान्य श्रेणी में आती है। यह मोहनलालगंज लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। सरोजनीनगर की खास बात यह है कि यहां ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ लखनऊ के तेजी से फैलते शहरी क्षेत्र से जुड़ी आबादी भी रहती है। यही वजह है कि इस सीट की राजनीति को समझने के लिए केवल शहर के मुद्दों को देखना काफी नहीं है। ग्रामीण इलाकों की जरूरतें, खेती-किसानी, सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं, वहीं दूसरी तरफ बढ़ती आबादी, यातायात और शहरी विकास, इन सभी पहलुओं पर नजर डालना जरूरी है। सरोजनीनगर में पिछले तीन विधानसभा चुनावों के नतीजों पर नजर डालें, तो यहां मतदाताओं ने अलग-अलग समय पर अलग-अलग दलों को मौका दिया। 2012 में समाजवादी पार्टी जीती, जबकि 2017 और 2022 में बीजेपी ने लगातार दो चुनावों में जीत हासिल की।
अब एक-एक करके समझते हैं कि इन तीन चुनावों में क्या हुआ और नतीजों ने किस तरह तस्वीर बदली।
साल 2012 का विधानसभा चुनाव सरोजनीनगर की सियासत में अहम रहा। उस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने शारदा प्रताप शुक्ला को उम्मीदवार बनाया था, जबकि बहुजन समाज पार्टी की तरफ से शिव शंकर सिंह मैदान में थे। मुकाबला मुख्य रूप से सपा और बसपा के बीच रहा। मतगणना के बाद शारदा प्रताप शुक्ला को 67 हजार 601 वोट मिले। वहीं बसपा के शिव शंकर सिंह को 59 हजार 236 वोट हासिल हुए। इस तरह शारदा प्रताप शुक्ला ने शिव शंकर सिंह को 8 हजार 365 वोटों से हराकर जीत दर्ज की। यानी 2012 में सरोजनीनगर की जनता ने सपा के पक्ष में फैसला सुनाया और विधानसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व शारदा प्रताप शुक्ला ने किया। उस चुनाव का नतीजा यह भी दिखाता है कि जीत का अंतर बहुत बड़ा नहीं था। सपा और बसपा के बीच मुकाबला करीबी रहा और दोनों प्रत्याशियों के वोटों में लगभग आठ हजार का अंतर था। लेकिन पांच साल बाद सरोजनीनगर में चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली थी। 2017 में बीजेपी ने यहां अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई और मुकाबले का केंद्र बदल गया।
अब बात करते हैं 2017 के विधानसभा चुनाव की। इस बार भारतीय जनता पार्टी ने स्वाति सिंह को उम्मीदवार बनाया। समाजवादी पार्टी की तरफ से अनुराग उर्फ अनुराग यादव मैदान में थे, जबकि बहुजन समाज पार्टी ने शिव शंकर सिंह को चुनाव लड़ाया। नतीजे आए तो बीजेपी की स्वाति सिंह ने जीत दर्ज की। उन्हें कुल 1 लाख 8 हजार 506 वोट मिले। वहीं सपा के अनुराग उर्फ अनुराग यादव को 74 हजार 327 वोट हासिल हुए। बसपा के शिव शंकर सिंह उर्फ शंकरी सिंह को 71 हजार 791 वोट मिले। इस तरह स्वाति सिंह ने सपा प्रत्याशी को 34 हजार 179 वोटों से हराया और सरोजनीनगर में बीजेपी का खाता खुला। यहां एक और अहम आंकड़ा समझना जरूरी है। सपा और बसपा के प्रत्याशियों के बीच केवल 2 हजार 536 वोटों का अंतर रहा। यानी दोनों दलों के बीच दूसरे और तीसरे स्थान के लिए करीबी मुकाबला देखने को मिला। 2012 में सपा ने जिस सीट पर जीत दर्ज की थी, 2017 में उसी सीट पर बीजेपी ने जीत हासिल कर ली। पांच साल के भीतर विजेता पार्टी बदल गई और जीत का अंतर भी 2012 के मुकाबले काफी बढ़ गया। लेकिन बीजेपी के लिए यह जीत आखिरी नहीं थी। 2022 में पार्टी ने एक नया चेहरा मैदान में उतारा और सरोजनीनगर की चुनावी कहानी में एक और बड़ा अध्याय जुड़ गया।
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में सरोजनीनगर सीट पर बीजेपी ने राजेश्वर सिंह को उम्मीदवार बनाया। राजेश्वर सिंह पूर्व आईपीएस अधिकारी और प्रवर्तन निदेशालय के पूर्व संयुक्त निदेशक रह चुके हैं। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी ने अभिषेक मिश्रा को मैदान में उतारा। चुनाव में बीजेपी के राजेश्वर सिंह को 1 लाख 60 हजार 626 वोट मिले। वहीं सपा के अभिषेक मिश्रा को 1 लाख 4 हजार 440 वोट हासिल हुए। बहुजन समाज पार्टी के मोहम्मद जलीश खान को 33 हजार 356 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के रुद्र दमन सिंह को 19 हजार 711 वोट प्राप्त हुए। नतीजों के मुताबिक राजेश्वर सिंह ने सपा के अभिषेक मिश्रा को 56 हजार 186 वोटों से हराया और बीजेपी लगातार दूसरी बार सरोजनीनगर की सीट जीतने में कामयाब रही। इस चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार को डेढ़ लाख से ज्यादा वोट मिले। जीत का अंतर भी 2017 के 34 हजार 179 वोटों से बढ़कर 56 हजार 186 वोट हो गया। यानी 2012 में सपा की जीत, 2017 में बीजेपी की वापसी और 2022 में बीजेपी की लगातार दूसरी जीत, ये तीनों नतीजे सरोजनीनगर के पिछले चुनावी इतिहास की अहम कड़ियां हैं।
अब नजर उस चुनाव पर, जिसकी चर्चा उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगे बढ़ने के साथ तेज होगी-2027 का विधानसभा चुनाव। सरोजनीनगर के पिछले तीन चुनावों का इतिहास बताता है कि 2012 में सपा ने जीत हासिल की थी, जबकि 2017 और 2022 में बीजेपी ने लगातार दो बार सीट जीती। बीजेपी के दोनों चुनावों में जीत का अंतर भी बढ़ा। लेकिन 2027 में क्या होगा, इसका फैसला अभी से नहीं किया जा सकता। अगले चुनाव में उम्मीदवार कौन होंगे, राजनीतिक दल किन मुद्दों को उठाएंगे, स्थानीय विकास को लेकर जनता का अनुभव क्या होगा और मतदाताओं की प्राथमिकताएं किस दिशा में रहेंगी, इन सभी बातों की भूमिका होगी। 2012 से 2022 तक का चुनावी सफर इस सीट पर बदलते जनादेश की कहानी जरूर बताता है, लेकिन 2027 का जनादेश क्या होगा, यह मतदाता ही तय करेंगे।
तो यह है लखनऊ की सरोजनीनगर विधानसभा सीट का पूरा चुनावी हिसाब। 2012 में सपा के शारदा प्रताप शुक्ला ने जीत दर्ज की। 2017 में बीजेपी की स्वाति सिंह विधायक बनीं और 2022 में राजेश्वर सिंह ने जीत हासिल कर बीजेपी का कब्जा बरकरार रखा। तीनों चुनावों में जीत के आंकड़े बदलते रहे, उम्मीदवार बदलते रहे और मुकाबले की तस्वीर भी बदलती रही। अब सवाल यह है कि आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सरोजनीनगर में जनता के मुद्दे क्या होंगे?

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