कृषि विज्ञान केंद्र एवं आत्मा परियोजना द्वारा कृषकों को दिया जा रहा ग्रामीण कौशल विकास प्रशिक्षण

मझगवां : दीनदयाल शोध संस्थान कृषि विज्ञान केंद्र मझगवां में 25 दिवसीय ग्रामीण कौशल विकास प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है‌। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ नवीन कुमार शर्मा ने बताया की ग्रामीण युवाओं और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र मझगवां एवं आत्मा परियोजना सतना के संयुक्त तत्वाधान में 25 दिवसीय ग्रामीण कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण 20 मई 2026 से 13 जून 2026 तक निरंतर संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में सतना एवं मैहर जिले के 8 विकासखंड के विभिन्न ग्रामों के प्रगतिशील किसान और ग्रामीण युवा बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।

प्रशिक्षण प्रभारी वैज्ञानिक श्री पंकज शर्मा एवं श्री पुष्पेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया की 25 दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में कृषि क्षेत्र से जुड़े अलग-अलग महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक और सैद्धांतिक जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है, ताकि किसानों की लागत कम हो और उनकी आय में वृद्धि हो सके।

दीनदयाल शोध संस्थान के वरिष्ठ कार्यकर्ता श्री राजेन्द्र सिंह ने प्रशिक्षणार्थियों को ग्रामों के स्वावलंबी  एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरित किया। प्रशिक्षण मे डॉ. अखिलेश जागरे वैज्ञानिक ने मशरूम उत्पादन, पौध संरक्षण एवं डॉ अजय चौरसिया समन्वित कृषि प्रणाली, बीज उत्पादन तथा वैज्ञानिक श्री पुष्पेंद्र सिंह गुर्जर ने सब्जी बीज उत्पादन की उन्नत तकनीक व श्री हेमराज द्विवेदी वैज्ञानिक गृह विज्ञान  ने फल एवं सब्जी प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन, श्री अशोक शर्मा द्वारा वर्मी-कम्पोस्ट उत्पादन तकनीक, इंजी. हरेन्द्र गुप्ता ने कृषि में डिजिटल माध्यम का प्रयोग, श्री पंकज शर्मा वैज्ञानिक ने प्राक्रतिक खेती उत्पादन तकनीक, डॉ ए. के. भौमिक आधिष्ठाता कृषि संकाय  ए.के.एस. विश्व विद्यालय सतना ने रेशम उत्पादन तकनीक, मधुमक्खी पालन, डॉ दीपेश भारत मिश्र वैज्ञानिक पशुपालन द्वारा डेयरी प्रबंधन बकरी एवं मुर्गी पालन, श्री सत्यम चौरिहा प्रक्षेत्र प्रबंधक द्वारा परंपरागत बीजों का सरंक्षण जैसे अलग अलग विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया गया है। 

प्रशिक्षण की आत्मा योजना प्रभारी श्रीमती अलका शुक्ला  का कहना है कि इस 25 दिवसीय प्रशिक्षण को पूरा करने के बाद ग्रामीण युवा न सिर्फ अपनी खेती को बेहतर बना सकेंगे, बल्कि कृषि आधारित खुद का व्यवसाय (जैसे- नर्सरी प्रबंधन, जैविक खाद एवं जैव कीटनाशक उत्पादन,बीज उत्पादन, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन एवं बकरी पालन आदि ) स्वरोजगार स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकेंगे। प्रशिक्षण के समापन पर सभी सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए जा रहे।

रिपोर्टर : सूर्य प्रकाश गुप्ता

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