कुंडली में शनि का भाव तय करता है अमीर बनेंगे या गरीब? जानें

कुंडली में शनि ग्रह (Saturn) का स्थान और उसकी दशा किसी व्यक्ति के जीवन में धन, संघर्ष, मेहनत और विलंब जैसे पहलुओं को गहराई से प्रभावित करता है। यह सच है कि शनि का प्रभाव तय कर सकता है कि व्यक्ति अमीर बनेगा या आर्थिक संघर्षों से गुजरेगा — लेकिन यह पूरी तरह शनि के भाव, स्थिति, दृष्टि और योगों पर निर्भर करता है।

शनि किस भाव में हो तो देता है बेशुमार दौलत?

नीचे कुछ मुख्य भाव बताए गए हैं जिनमें शनि की उपस्थिति व्यक्ति को अमीर बना सकती है:

दूसरा भाव (धन भाव): यदि शनि दूसरे भाव में शुभ स्थिति में है (उच्च का हो, या स्वग्रही हो, शुभ दृष्टि हो), तो व्यक्ति को धन संचय करने में सफलता मिलती है।

ग्यारहवां भाव (लाभ भाव): यह भाव आमदनी, लाभ और आय से जुड़ा होता है। यहां शनि मजबूत हो तो व्यक्ति को स्थायी और नियमित आय का स्रोत मिलता है।

दसवां भाव (कर्म भाव): शनि अगर इस भाव में अच्छी स्थिति में हो, तो व्यक्ति मेहनत से बड़ा व्यवसाय या उच्च पद प्राप्त करता है और आर्थिक रूप से सशक्त बनता है।

पांचवां या नवम भाव (पुरुषार्थ और भाग्य भाव): भाग्य का साथ और बुद्धिमत्ता दोनों का मेल धन अर्जन में सहायक होता है।

किन स्थितियों में शनि कर देता है आर्थिक रूप से कमजोर?
यदि शनि षष्ठ (6वें), अष्टम (8वें), या द्वादश (12वें) भाव में नीच का हो, या पाप ग्रहों से पीड़ित हो, तो यह आर्थिक कष्ट दे सकता है।

अशुभ योगों, जैसे कि शनि राहु की युति (शनि-राहु दोष), जीवन में संघर्ष और धन की रुकावटें लाता है।

शनि की दशा और अंतरदशा:

शनि की महादशा अगर शुभ योग में हो, और कुंडली में अच्छी स्थिति में हो, तो यह मेहनत के बाद बड़ा फल देती है।
कई बार शनि व्यक्ति को धीरे-धीरे लेकिन स्थायी रूप से समृद्ध बनाता है। इसे "धीरे देता है लेकिन टिकाऊ देता है" कहावत से जोड़ा जाता है।

कब मिलती है बेशुमार दौलत?

जब शनि शुभ भावों में हो और लाभकारी ग्रहों (जैसे शुक्र, गुरु) से दृष्ट हो।

शनि के साथ राजयोग बन रहा हो जैसे कि शश योग (शनि का केंद्र में उच्च राशि में होना)।

शनि दशा में ग्यारहवें या दूसरे भाव से संबंध बन रहा हो।

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