दिल्ली बिल्डिंग हादसे पर बड़ा एक्शन! 5 MCD अफसर निलंबित, मालिक की तलाश तेज
दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही बहुमंजिला इमारत ढहने के हादसे ने राजधानी को झकझोर दिया है। हादसे का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें इमारत के नीचे स्टॉल लगाकर बैठे एक बुजुर्ग को अचानक मलबा गिरता दिखाई देता है। खतरा भांपते ही बुजुर्ग अपनी जान बचाने के लिए वहां से भागते हैं। कुछ ही सेकेंड बाद पूरी इमारत भरभराकर गिर जाती है और इलाके में धूल का गुबार फैल जाता है।
जानकारी के मुताबिक, हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। मलबे में अभी भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका है, जिनमें छात्र भी शामिल हैं। NDRF, CATS एंबुलेंस, दिल्ली पुलिस, फायर सर्विस और अन्य प्रशासनिक टीमें लगातार राहत और बचाव अभियान में जुटी हैं।
हादसे के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। MCD के पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। इनमें साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, SE रणवीर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (बिल्डिंग) ललित कुमार, असिस्टेंट इंजीनियर (बिल्डिंग) सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर (बिल्डिंग) आशीष कुमार शामिल हैं। MCD कमिश्नर संजीव खिरवार ने बताया कि हादसे में सात लोगों की जान गई है। उन्होंने कहा कि हादसे से सटी दूसरी इमारत भी कमजोर हो गई है और उसे अगले एक-दो दिनों में सावधानीपूर्वक गिराने की तैयारी की जा रही है।
एडिशनल DCP अभिमन्यु पोसवाल के मुताबिक, 6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे PCR कॉल के जरिए इमारत गिरने की सूचना मिली थी। पुलिसकर्मियों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर कुछ छात्रों को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। बाद की जांच में मलबे के नीचे और लोगों के दबे होने की जानकारी सामने आई। स्थानीय जानकारी के मुताबिक, इमारत में PG चल रहा था और यहां अलग-अलग जगहों से छात्र आकर रह रहे थे। यही वजह है कि मलबे में कई छात्रों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
हादसे के बाद आसपास के दूसरे हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, घटनास्थल से करीब 70-80 मीटर दूर एक अन्य हॉस्टल में आने-जाने के लिए बेहद संकरा रास्ता है और बाहर निकलने वाले रास्ते पर लोहे का गेट लगा हुआ है। वहां बिजली के तार भी अव्यवस्थित तरीके से लटके होने की बात सामने आई है। करीब 100 मीटर दूर इसी कंपनी का एक और पांच मंजिला हॉस्टल होने की जानकारी दी गई है, जहां भी बिजली के तारों को लेकर सुरक्षा संबंधी सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इलाके में निर्धारित सीमा से अधिक मंजिलों वाली कुछ इमारतें भी मौजूद हैं।
पुलिस और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, हादसे वाली इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर रेनोवेशन का काम चल रहा था। आरोप है कि इस दौरान सुरक्षा मानकों का ध्यान नहीं रखा गया और पिलर व दीवारों से छेड़छाड़ की गई, जिससे ढांचा कमजोर हुआ। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
इस मामले में दिल्ली पुलिस के साउथ कैंपस थाने में इमारत के मालिक हरिराम बंसल और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस ने हरिराम बंसल के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) भी जारी किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी फरार है और उसकी तलाश में दिल्ली-NCR, गुरुग्राम समेत कई जगहों पर छापेमारी की जा रही है। हरिराम बंसल की तलाश के लिए पुलिस ने 10 टीमें गठित की हैं। इन टीमों में स्थानीय पुलिस, स्पेशल स्टाफ और ऑपरेशन यूनिट के पुलिसकर्मी शामिल हैं। टीमों की निगरानी एडिशनल DCP रैंक के अधिकारी कर रहे हैं। पुलिस दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
हादसे की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, मंत्री कपिल मिश्रा, स्थानीय विधायक और वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने राहत और बचाव अभियान का जायजा लिया और अधिकारियों को रेस्क्यू ऑपरेशन में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतने के निर्देश दिए। इसके बाद मुख्यमंत्री एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचीं और हादसे में घायल तथा रेस्क्यू किए गए छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों से घायलों की स्थिति की जानकारी ली और बेहतर एवं मुफ्त इलाज के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने 7 सितंबर को भी घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने कहा कि आसपास की जर्जर इमारतों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। खास तौर पर हादसे से सटी कमजोर इमारत को तत्काल प्रभाव से गिराने की बात कही गई।
हादसे के बाद MCD ने ढही हुई इमारत के ठीक बगल वाली बिल्डिंग को खाली कराने का नोटिस जारी किया है। MCD के मुताबिक, दिल्ली नगर निगम अधिनियम 1957 की धारा 348 के तहत मकान नंबर 13 का परिसर खतरनाक और जर्जर स्थिति में पाया गया है। नोटिस में मालिक और निवासियों को तीन दिनों के भीतर इस खतरनाक ढांचे को स्वयं ध्वस्त करने का निर्देश दिया गया है। ऐसा नहीं करने पर MCD की ओर से इमारत गिराई जाएगी और उसका खर्च मकान मालिक से वसूलने की चेतावनी दी गई है।
हादसे को लेकर ABVP ने भी MCD पर सवाल उठाए हैं। ABVP की नेशनल सोशल मीडिया कन्वीनर प्रेरणा भारद्वाज ने कहा कि संगठन जवाबदेही की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने MCD कमिश्नर के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि छात्रों की सुरक्षा के मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। ABVP का कहना है कि जब तक आखिरी छात्र को सुरक्षित बाहर नहीं निकाला जाता, तब तक वे वहां से नहीं हटेंगे।
फिलहाल राहत और बचाव अभियान जारी है। हादसे की वजह, इमारत की सुरक्षा स्थिति और जिम्मेदार लोगों की भूमिका को लेकर जांच आगे बढ़ रही है। रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने और जांच आगे बढ़ने के बाद हादसे की पूरी तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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