सत्य निकेतन हादसे के पीछे कौन? अवैध PG, मरम्मत और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
दिल्ली...देश की राजधानी...और राजधानी का वो इलाका जहां हजारों छात्र अपने सपनों को पूरा करने के लिए रहते हैं। लेकिन रविवार दोपहर सत्य निकेतन में कुछ ऐसा हुआ...जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। एक बहुमंजिला इमारत...नीचे पीजी में रहने वाले छात्र...ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत का काम...और देखते ही देखते पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह भरभराकर जमीन पर आ गिरी। जी हां दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस से सटा और छात्रों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाला सत्य निकेतन अचानक मलबे के ढेर और धूल के गुबार में तब्दील हो गया। पेइंग गेस्ट के तौर पर इस्तेमाल हो रही एक 40-50 साल पुरानी 5 मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह भरभराकर जमींदोज हो गई। इमारत गिरने का वो मंजर इतना खौफनाक था कि सामने लगे CCTV कैमरे में कैद तस्वीरें देखकर रोंगटे खड़े हो जाएं। सत्य निकेतन के इस हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है...रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी रहा...और मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए NDRF, दिल्ली फायर सर्विस और दूसरी एजेंसियां दिन-रात जुटी हैं। लेकिन हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल सिर्फ ये नहीं है कि इमारत कैसे गिरी...सवाल ये है कि क्या इस हादसे को रोका जा सकता था? क्या नियमों को ताक पर रखकर PG और हॉस्टल चल रहे थे? क्या मरम्मत के नाम पर इमारत के पिलर और ढांचे के साथ छेड़छाड़ की गई? आइए...पूरी तस्वीर समझते हैं।
रविवार...समय करीब दोपहर 1 बजकर 30 मिनट। दक्षिणी दिल्ली का सत्य निकेतन इलाका। दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के बिल्कुल करीब होने की वजह से यहां बड़ी संख्या में छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं। इसी इलाके में करीब 40 से 50 साल पुरानी एक बहुमंजिला इमारत थी। इमारत में बेसमेंट और पांच ऊपरी मंजिलें थीं। इसका इस्तेमाल लड़कों के PG के तौर पर किया जा रहा था। फिर अचानक...इमारत भरभराकर गिर गई। CCTV में पूरा मंजर कैद हो गया।
इमारत के नीचे बैठे बुजुर्ग ने जैसे ही ऊपर से मलबा गिरते देखा...वो वहां से भागे। और इसके कुछ सेकेंड बाद पूरी बिल्डिंग नीचे आ गई। सड़क पर मलबा फैल गया...धूल का गुबार छा गया...और देखते ही देखते जहां छात्र रहते थे...वहां सिर्फ मलबे का पहाड़ नजर आने लगा। वहीं इमारत गिरते ही आसपास मौजूद लोगों ने बचाव शुरू कर दिया। किसी ने हाथों से मलबा हटाया...किसी ने अपने औजार निकाले...तो कोई अंदर फंसे लोगों की आवाज सुनने की कोशिश करता रहा। इसके बाद दिल्ली पुलिस, फायर ब्रिगेड, NDRF और दूसरी राहत-बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं। मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश शुरू हुई। NDRF की टीम ने खोजी कुत्तों के साथ-साथ लाइफ डिटेक्टर का इस्तेमाल किया। मलबा काटने के लिए कॉम्बी कटर, प्लाज्मा कटर और दूसरे तकनीकी उपकरण लगाए गए। वहीं हादसे के बाद घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचाया गया। इनमें से कई लोगों को अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत घोषित कर दिया गया। एक गंभीर घायल ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इसके बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 6 हो गई। घायलों में छात्र और मजदूर दोनों शामिल हैं।
वहीं प्रारंभिक जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इस बहुमंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर और बेसमेंट में बिना सुरक्षा मानकों का ध्यान रखे मरम्मत और खुदाई का काम चल रहा था। आरोप है कि अवैध रूप से पिलर और दीवारों से छेड़छाड़ की जा रही थी और जलभराव के कारण इमारत की नींव कमजोर हो गई। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी कहा कि बेसमेंट में खुदाई का काम चल रहा था और इसी दौरान एक पिलर खिसकने से पूरी इमारत ढह गई। हालांकि हादसे की सही वजह का पता जांच के बाद ही चलेगा। यही वजह है कि सरकार ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। अब जांच में ये देखा जाएगा कि निर्माण या मरम्मत के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन हुआ था या नहीं...इमारत की स्थिति पहले से खराब थी या नहीं...और सबसे बड़ा सवाल...अगर नियमों का उल्लंघन हुआ तो आखिर जिम्मेदार कौन है? आपको बता दें इस मामले में दिल्ली पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम बंसल और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस ने हरिराम बंसल की तलाश तेज कर दी है। बताया गया है कि वो अपने घर से फरार है।
वहीं दूसरी तरफ हादसे के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों और ABVP-AAP छात्र विंग का गुस्सा फूट पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने सिविक सेंटर स्थित MCD दफ्तर पर धावा बोला और एमसीडी कमिश्नर के इस्तीफे की मांग की। छात्रों का आरोप है कि नियमों की धज्जियां उड़ाकर 3 मंजिल की अनुमति वाली जगह पर 5-5 मंजिला अवैध पीजी बनाए गए हैं, जहां सुरक्षा का कोई नामोनिशान नहीं है। वहीं सत्य निकेतन हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुख जताया। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी हादसे पर चिंता जताई और बचाव दलों से घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने की अपील की।
दिल्ली विश्वविद्यालय ने भी हादसे पर दुख जताया और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
देखा जाए तो सत्य निकेतन का यह हादसा सिर्फ एक इमारत का गिरना नहीं है, बल्कि यह लालच, अवैध निर्माण और प्रशासनिक अनदेखी का नतीजा है। पढ़ाई के सपने लेकर दिल्ली आए मासूम छात्रों की जान की कीमत पर आखिर कब तक अवैध पीजी का कारोबार चलता रहेगा? क्या मकान मालिक हरिराम बंसल की जल्द गिरफ्तारी हो पाएगी? क्या दिल्ली-एनसीआर के अन्य संकरे इलाकों में चल रहे जानलेवा हॉस्टलों पर बुलडोजर चलेगा या फिर कुछ दिनों बाद यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा? इस बड़े हादसे के बाद अब पूरे तंत्र की जवाबदेही पर जनता की नजरें टिकी हुई हैं!
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