सऊदी अरब में 2 बांग्लादेशियों को फांसी! परिवार को भी नहीं मिली खबर?

दुनिया के सबसे सख्त कानून वाले देश सऊदी अरब से एक ऐसी सनसनीखेज और रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश समेत पूरी दुनिया में भूचाल ला दिया है! मक्का की एक पवित्र मस्जिद के अंदर कथित तौर पर किस करने के आरोप में दो बांग्लादेशी नागरिकों एक युवक और एक युवती को चुपचाप मौत के घाट उतार दिया गया! हैरानी की बात तो यह है कि सजा देने के बाद सऊदी प्रशासन ने न तो यह साफ किया कि उनका जुर्म असल में क्या था और न ही उनके परिवारों या बांग्लादेश सरकार को इसकी कानों-कान खबर तक होने दी! जब इस खौफनाक और रहस्यमयी फांसी की खबर दुनिया के सामने आई, तो हर कोई सन्न रह गया। आखिर क्या था वो गुनाह जिसके लिए रातों-रात मौत का फरमान सुना दिया गया? आइए जानते हैं!

दरअसल, बात करते हैं खाड़ी देश सऊदी अरब की, जहां के कानून और न्याय व्यवस्था के कायदे दुनिया भर में सबसे कड़े माने जाते हैं। हाल ही में सऊदी अरब के गृह मंत्रालय ने एक ऐसा ऐलान किया जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मक्का क्षेत्र की एक मस्जिद के अंदर कथित रूप से किस करने के आरोप में दो बांग्लादेशी नागरिकों को मौत की सजा दे दी गई। इन दोनों की पहचान नजरुल इस्लाम अब्दुल बशीर और सिटी अख्तर के रूप में हुई है। सऊदी प्रेस एजेंसी के जरिए सामने आए बयान में बताया गया कि सुरक्षा अधिकारियों ने दोनों को गिरफ्तार किया, उनपर आरोप तय किए और अदालत में मामला चलाया गया। अदालत ने उन्हें इस्लामी कानून के तहत न्यायाधीश के विवेक पर दी जाने वाली सजा के तहत दोषी पाया और शाही आदेश के बाद उन्हें फांसी दे दी गई। लेकिन सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर खड़ा हो गया है कि सऊदी सरकार ने यह साफ ही नहीं किया कि आखिर उन दोनों ने मस्जिद के अंदर ऐसा कौन सा घिनौना या अनैतिक काम किया था! सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। कुछ का कहना है कि वे मस्जिद के अंदर एक-दूसरे को किस कर रहे थे, तो कुछ का दावा है कि यह सिर्फ माथे पर किया गया एक हल्का सा किस था। लेकिन किसी भी आधिकारिक सूत्र ने इस बात की पुष्टि नहीं की है।

वहीं दूसरी तरफ इस पूरी घटना ने पीड़ितों के परिवारों को अंदर से तोड़कर रख दिया है। नजरुल इस्लाम के पिता अब्दुल बशीर, जो खुद 24 साल तक सऊदी अरब में काम कर चुके हैं, उनका कहना है कि उनके बेटे को निष्पक्ष सुनवाई का मौका तक नहीं दिया गया। नजरुल नवंबर 2022 में बेहतर भविष्य की आस लेकर सऊदी गए थे और मक्का की प्रसिद्ध मस्जिद अल-हरम में सफाईकर्मी के तौर पर काम करते थे। परिवार का कहना है कि उन्हें बिना किसी ठोस वजह के मौत के मुंह में धकेल दिया गया। वहीं नजरुल की मौत की खबर जैसे ही उनके घर पहुंची, उनकी 65 वर्षीय चाची सदमे से बेहोश हो गईं और दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई! वहीं दूसरी तरफ, मारी गई युवती सिटी अख्तर के पिता फजल मिया, जो एक दिहाड़ी मजदूर हैं, उन्होंने बताया कि उनकी बेटी ने कभी अपने मुकदमे या सजा के बारे में घर पर कुछ नहीं बताया था। आखिरी कॉल में भी उसने कहा था कि वह जल्द ही जेल से रिहा होने वाली है।

आपको बता दें इस हाई-प्रोफाइल मामले में सबसे बड़ा पेंच कूटनीतिक स्तर पर फंसा हुआ है। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री और सरकार ने साफ कर दिया है कि जेद्दा स्थित बांग्लादेशी महावाणिज्य दूतावास या ढाका को इस फांसी के बारे में पहले से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई थी। दोनों देश वियना कन्वेंशन के तहत जुड़े हुए हैं, जिसके नियम कहते हैं कि किसी भी विदेशी नागरिक पर कार्रवाई से पहले उसके देश के दूतावास को सूचित किया जाना चाहिए। लेकिन इस मामले में नियमों को ताक पर रखकर चुपचाप सब कुछ निपटा दिया गया। बांग्लादेश ने अब सऊदी विदेश मंत्रालय से आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगते हुए पूछा है कि आखिर सूचना साझा करने में इतनी बड़ी चूक क्यों हुई। वहीं सऊदी अरब में मानवाधिकार संगठन पहले से ही एक्टिव हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि साल 2025 में सऊदी अरब ने रिकॉर्ड 356 लोगों को मौत की सजा दी थी, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा विदेशी कामगारों का था। सऊदी अरब में अश्लीलता, नशीले पदार्थों की तस्करी या धार्मिक स्थलों की पवित्रता को ठेस पहुंचाने वाले मामलों में जरा भी नरमी नहीं बरती जाती। मक्का और मदीना जैसे पवित्र शहरों में सार्वजनिक रूप से स्नेह जताना, शालीन कपड़े न पहनना या नियमों का उल्लंघन करना बेहद भारी पड़ सकता है।

तो देखा आपने मक्का में दो बांग्लादेशी नागरिकों को मौत की सजा दिए जाने का यह मामला कई गंभीर सवाल छोड़ गया है। साथ ही इस रहस्यमयी घटना और उसके बाद दी गई मौत की सजा ने एक बार फिर विदेशी कामगारों की सुरक्षा और खाड़ी देशों के कड़े कानूनों पर दुनिया भर की बहस को छेड़ दिया है। बिना जुर्म साफ किए और बिना दूतावास को बताए इस तरह फांसी देना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। अब यह देखना होगा कि दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद कौन-सी जानकारी सामने आती है और क्या परिवारों को अपने सवालों के जवाब मिल पाते हैं।

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