7 घंटे के लिए दूसरी दुनिया चली गई महिला! लौटकर किया खुलासा, कौन-कौन रहता है स्वर्ग के अंदर?
न्यू जर्सी की एरिका टेट की कहानी मौत और जीवन के बीच की एक बेहद अनोखी और भावनात्मक यात्रा है। साल 2015 में, महज़ 22 साल की उम्र में, एरिका Palisades Cliffs पर हाइकिंग के दौरान करीब 60 फीट नीचे गिर गई थीं। इस भयानक हादसे में उनकी स्पाइनल कॉर्ड टूट गई, पेल्विस, बाजू और पसलियों में कई फ्रैक्चर हो गए और दोनों फेफड़े पंक्चर हो गए। दर्द इतना असहनीय था कि सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था, फिर भी उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए अपना फोन निकाला और इमरजेंसी कॉल किया।
लोकेशन ठीक से न बता पाने के कारण रेस्क्यू टीम को उन्हें ढूंढने में लगभग सात घंटे लग गए। एरिका का कहना है कि ये सात घंटे उनके लिए सामान्य समय नहीं थे उनका अनुभव था कि वे उस दौरान इस दुनिया में नहीं थीं। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने शरीर से अलग होने, गहरी शांति, डर से मुक्त होने और एक अलग ही जगह पर होने का एहसास हुआ, जिसे वे मौत के बाद की दुनिया जैसा मानती हैं। जब रेस्क्यू टीम ने उन्हें पाया, तो वे फिर उसी टूटे हुए शरीर और दर्द भरी हकीकत में लौट आईं। लंबे इलाज और रिहैब के बाद एरिका बच तो गईं, लेकिन इस अनुभव ने उनकी सोच पूरी तरह बदल दी। आज वे जीवन को पहले से कहीं ज्यादा कीमती मानती हैं और कहती हैं कि अब उन्हें मौत से डर नहीं लगता, क्योंकि वे उसे बहुत करीब से देख चुकी हैं।
बदल गई दुनिया
इन सात घंटों के दौरान एरिका क्लिनिकल रूप से मौत के बेहद करीब पहुँच चुकी थी। उसके अनुसार, उस समय उसने एक ऐसी अलग दुनिया का अनुभव किया जिसने उसकी सोच और जीवन दोनों को हमेशा के लिए बदल दिया। एरिका ने इस अनुभव को YouTube चैनलों NDE Journey और The Other Side NDE पर लोगों के साथ साझा किया है। उसका कहना है कि पहाड़ी से गिरने के बाद उसकी चेतना उसके शरीर से अलग हो गई थी।
वह ऊपर से अपनी ही टूटी-फूटी देह को नीचे पड़ी हुई देख रही थी और तभी उसे एहसास हुआ कि उसका असली अस्तित्व यह शरीर नहीं है। उस अवस्था में उसे गहरी शांति महसूस हुई और सारा दर्द जैसे खत्म हो गया। इसके बाद उसने जिसे “लाइफ रिव्यू” कहा, वह अनुभव हुआ उसकी पूरी ज़िंदगी एक फिल्म की तरह उसकी आँखों के सामने चलने लगी। उसने देखा कि उसके पुराने घावों, फैसलों और व्यवहारों ने न सिर्फ उसे बल्कि दूसरों को भी कैसे प्रभावित किया था। हर किए गए कर्म का असर साफ-साफ दिखाई दे रहा था।
पहुंच गई स्वर्ग में
एरिका के मुताबिक इसके बाद वह एक तेज़, उजली रोशनी की ओर खिंचती चली गईं, जिसे वह ईश्वर, स्रोत या यूनिवर्सल कॉन्शसनेस के रूप में समझती हैं। यह रोशनी किसी निर्जीव चीज़ जैसी नहीं थी, बल्कि चेतन थी प्यार, अपनापन और गहरी शांति से भरी हुई। वहाँ न तो फरिश्ते थे, न कोई गुज़रे हुए रिश्तेदार और न ही किसी तरह का फैसला या सज़ा। बस एक स्पष्ट संदेश था कि हम सभी एक ही ऊर्जा से बने हैं। हर कोशिका, हर परमाणु उसी एक स्रोत से जन्मा है।
हम अलग-अलग नहीं हैं, बल्कि पूरी तरह आपस में जुड़े हुए हैं। किसी और को पीड़ा देना दरअसल खुद को ही चोट पहुँचाना है। जीवन का असली उद्देश्य इसी एकता को याद रखना और करुणा के साथ जीना है। एरिका का कहना है, “मौत अंत नहीं है, वह सिर्फ एक भ्रम है। हम नश्वर नहीं, बल्कि शाश्वत हैं।” वहाँ न स्वर्ग-नरक का कोई न्याय था, सिर्फ एक होने का गहरा एहसास था। यही अनुभव इतना प्रभावशाली था कि जो एरिका पहले खुद को नास्तिक मानती थीं, वह इस घटना के बाद आध्यात्मिक हो गईं।

No Previous Comments found.