सीहोर में ‘अनुभवों का मिलन’ कार्यक्रम, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी राजेंद्र सिंह मेवाड़ा की पुस्तक ‘मुझे उड़ान भरनी है’ का विमोचन
सीहोर : सीहोर में साहित्य, समाज और जीवन के अनुभवों को एक मंच पर जोड़ने वाला गरिमामय कार्यक्रम ‘अनुभवों का मिलन’ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्य और समाज से जुड़े अनेक लोगों ने सहभागिता की। इस अवसर पर भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए लेखक राजेंद्र सिंह मेवाड़ा की पुस्तक ‘मुझे उड़ान भरनी है’ का भव्य विमोचन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक श्री सुदेश राय ने की। उनकी गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम ने साहित्य और समाज के बीच एक सुंदर सेतु का कार्य किया।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद मंचासीन अतिथियों द्वारा लेखक राजेंद्र सिंह मेवाड़ा की पुस्तक ‘मुझे उड़ान भरनी है’ का विधिवत विमोचन किया गया।
गौरतलब है कि लेखक राजेंद्र सिंह मेवाड़ा भारतीय सेना में लंबे समय तक अपनी सेवाएं देने के बाद 31 मई 2026 को सेवानिवृत्त हुए। सेना का जीवन अनुशासन, संघर्ष, जिम्मेदारी और देशभक्ति से जुड़ा होता है। इसी जीवन के अनुभवों को उन्होंने साहित्य के माध्यम से शब्दों में पिरोने का प्रयास किया है।
‘मुझे उड़ान भरनी है’ शायरी और कविताओं पर आधारित पुस्तक है। पुस्तक के नाम में ही एक सकारात्मक सोच और आगे बढ़ने की प्रेरणा दिखाई देती है। यह पुस्तक उन भावनाओं को सामने लाती है, जो इंसान को कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों की ओर लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
लेखक ने अपने सैन्य जीवन के अनुभवों, संघर्षों, देशप्रेम और जीवन से मिली सीख को अपनी रचनाओं में स्थान दिया है। यही कारण है कि यह पुस्तक केवल साहित्यप्रेमियों के लिए ही नहीं, बल्कि युवाओं और जीवन में संघर्ष कर रहे प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणादायक मानी जा सकती है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक श्री सुदेश राय ने लेखक राजेंद्र सिंह मेवाड़ा को पुस्तक के विमोचन पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि देश सेवा के बाद साहित्य के माध्यम से समाज को अपनी अनुभूतियां और विचार देना अपने आप में महत्वपूर्ण कार्य है।
विधायक ने कहा कि ‘मुझे उड़ान भरनी है’ केवल शब्दों का संकलन नहीं, बल्कि जीवन के अनुभवों, संघर्षों और हौसलों से निकली एक ऐसी रचना है, जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यप्रेमियों और गणमान्य नागरिकों ने भी पुस्तक की सराहना की। लोगों ने कहा कि सेना जैसे अनुशासित क्षेत्र से आने वाले व्यक्ति के अनुभव जब साहित्य का रूप लेते हैं, तो उसमें जीवन की वास्तविकता और संघर्षों की गहराई देखने को मिलती है।
लेखक राजेंद्र सिंह मेवाड़ा ने पुस्तक के विमोचन के अवसर पर सभी अतिथियों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना में देश की सेवा करना उनके जीवन का गौरवपूर्ण अध्याय रहा है और अब साहित्य के माध्यम से समाज से जुड़ना उनके लिए एक नया अनुभव है।
उन्होंने यह भी कहा कि ‘अनुभवों का मिलन’ जैसे कार्यक्रम समाज के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों को एक मंच प्रदान करते हैं। ऐसे आयोजन विचारों, अनुभवों और प्रतिभाओं को समाज के सामने लाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, गणमान्य नागरिक, सैन्य परिवारों से जुड़े लोग और समाज के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
पुस्तक विमोचन के बाद उपस्थित लोगों में पुस्तक को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। साहित्यप्रेमियों ने पुस्तक की प्रतियां प्राप्त कीं और लेखक से ऑटोग्राफ भी लिए।
कुल मिलाकर ‘अनुभवों का मिलन’ कार्यक्रम सीहोर में साहित्य और समाज के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण अवसर बना। वहीं, ‘मुझे उड़ान भरनी है’ के माध्यम से राजेंद्र सिंह मेवाड़ा ने अपने जीवन के अनुभवों को शब्दों में ढालकर पाठकों के सामने एक नई साहित्यिक यात्रा की शुरुआत की है।
यह पुस्तक हमें यही संदेश देती है कि जीवन में परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर इंसान के भीतर सपने देखने का साहस, लक्ष्य पाने का संकल्प और आगे बढ़ने का हौसला हो, तो वह अपने सपनों को नई उड़ान दे सकता है।
शायद इसी भावना को पुस्तक का शीर्षक भी सबसे खूबसूरती से व्यक्त करता है—
‘मुझे उड़ान भरनी है।’
रिपोर्टर : रजनी

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