तरियानी के छतौनी में खेत बचाओ सह- खरीफ अभियान का आयोजन

शिवहर - कृषि विज्ञान केंद्र शिवहर एवं आत्मा शिवहर  के संयुक्त तत्वावधान में ‘खेत बचाओ अभियान सह खरीफ अभियान’ का आयोजन डुमरी कटसरी प्रखंड के भट्ठा गांव तथा तरियानी प्रखंड के छतौनी गांव में किया गया। कार्यक्रम में 150 से अधिक किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को खरीफ फसलों की उन्नत तकनीकों, जल संरक्षण तथा बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप खेती अपनाने के लिए जागरूक किया गया। इस अवसर पर डॉ. सौरभ शंकर पटेल, वैज्ञानिक (पादप संरक्षण), ने किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के अनुसार इस वर्ष मानसून अपेक्षाकृत कमजोर रहने की संभावना है। ऐसी स्थिति में किसानों को धान की सीधी बुआई (DSR) तकनीक अपनाने तथा कम अवधि वाली धान की किस्में जैसे राजेन्द्र सरस्वती एवं राजेन्द्र श्वेता का चयन करने की सलाह दी गई।जिससे कम पानी में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।

उन्होंने बताया कि धान की सीधी बुआई तकनीक से पानी, श्रम एवं लागत की बचत होती है एवं इस विधि में खरपतवार प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि फसल के प्रारंभिक 30–40 दिनों में खरपतवारों की प्रतिस्पर्धा से उपज में भारी कमी आ सकती है। प्रभावी खरपतवार नियंत्रण के लिए बुआई के 0–3 दिनों के भीतर पेंडीमेथालिन 30 EC का 3.3 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए।

 छिड़काव के समय खेत में पर्याप्त नमी होना आवश्यक है। इसके बाद बुआई के 20–25 दिनों पर, जब खरपतवार 2–4 पत्ती अवस्था में हों, बिसपाइरीबैक सोडियम 10 SC का 250 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 500–600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। यह क्रम घास, चौड़ी पत्ती तथा मोथा वर्ग के खरपतवारों के प्रभावी नियंत्रण में सहायक होता है।

 कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. अनुराधा रंजन कुमारी, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान, केवीके शिवहर ने धान की खेती में एजोला के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एजोला एक जैव उर्वरक के रूप में कार्य करता है, जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर धान की फसल को पोषण प्रदान करता है तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करता है। उन्होंने किसानों को जैविक खेती के सिद्धांतों एवं लाभों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। 

बीटीएम श्री वीरेन्द्र कुमार एवं श्री जितेन्द्र कुमार ने किसानों को किसान रजिस्ट्री, बिहार कृषि ऐप तथा सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को धान की उन्नत किस्म स्वर्णा पूर्वी के बारे में भी बताया, जो सीधी बुआई के लिए उपयुक्त मानी जाती है तथा कम जल उपलब्धता की परिस्थितियों में भी अच्छा प्रदर्शन करती है। यह किस्म अच्छी उपज क्षमता तथा जलवायु अनुकूलन क्षमता के कारण किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती है। कार्यक्रम के अंत में किसानों की समस्याओं का समाधान किया गया तथा खरीफ मौसम में वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाकर लागत कम करने एवं उत्पादन बढ़ाने का आह्वान किया गया।

रिपोर्टर - संजय गुप्ता

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