शब्दों के साधक स्वर्गीय इंद्रदेव तिवारी ""द्विजदेव""को भावभीनी श्रद्धांजलि
शिवहर - शिवहर की साहित्यिक धरती ने आज अपने एक ऐसे सपूत को भावुक होकर याद किया,जिसने अपनी लेखनी और कविता के माध्यम से वर्षों तक साहित्य की सेवा की। सरस्वती अध्ययन केंद्र में सेवानिवृत्त शिक्षक तथा शिवहर के वरिष्ठ कवि स्वर्गीय इंद्रदेव तिवारी के निधन पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा में साहित्य से जुड़े लोगों और कवियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी साहित्यिक यात्रा और व्यक्तित्व को याद किया। कार्यक्रम के दौरान स्वर्गीय इंद्रदेव तिवारी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया गया। वातावरण में शोक के साथ-साथ उनकी कविताओं, उनके विचारों और साहित्य के प्रति उनके समर्पण की स्मृतियां तैरती रहीं। उपस्थित कवियों ने कहा कि इंद्रदेव तिवारी का जाना केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि शिवहर की साहित्यिक परंपरा के एक महत्वपूर्ण अध्याय का विराम है।
श्रद्धांजलि सभा में बैद्यनाथ शाहपुरी, राजेंद्र सिंह,देशबंधु शर्मा, मोहन फत्तहपुरी,रामदेव बुनियादी, रानी गुप्ता, संजय कुमार तथा मुकुन्द प्रकाश मिश्रा सहित कई कवियों और साहित्यप्रेमियों ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने स्वर्गीय इंद्रदेव तिवारी के जीवन-सफर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने साहित्य को केवल शब्दों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे अपने जीवन का हिस्सा बनाया। उनकी रचनाओं में समाज, संवेदना, मानवीय रिश्तों और जीवन के अनुभवों की झलक मिलती थी। वे नई पीढ़ी के साहित्यकारों और कवियों के लिए भी प्रेरणा के स्रोत रहे। सभा में वक्ताओं ने कहा कि मनुष्य चला जाता है, लेकिन उसके शब्द रह जाते हैं। शरीर का अंत जीवन की यात्रा को रोक सकता है, लेकिन किसी रचनाकार की संवेदनाएं उसकी रचनाओं के माध्यम से लंबे समय तक जीवित रहती हैं। इंद्रदेव तिवारी भी अपनी कविताओं, अपनी स्मृतियों और अपने साहित्यिक योगदान के माध्यम से शिवहर की साहित्यिक चेतना में सदैव जीवित रहेंगे।
श्रद्धांजलि सभा का माहौल उस समय और अधिक भावुक हो गया, जब उनके साथ बिताए समय और साहित्यिक यात्राओं की स्मृतियां साझा की गईं। किसी ने उनके सरल स्वभाव को याद किया, तो किसी ने उनकी साहित्य के प्रति निष्ठा को। किसी ने उनकी कविता में छिपी संवेदना की चर्चा की, तो किसी ने उनके व्यक्तित्व की सहजता को याद किया। शिवहर की साहित्यिक दुनिया आज भले ही इंद्रदेव तिवारी की कमी महसूस कर रही हो, लेकिन उनके शब्द आने वाली पीढ़ियों को यह बताते रहेंगे कि साहित्य केवल लिखा नहीं जाता, उसे जिया भी जाता है। सरस्वती अध्ययन केंद्र में आयोजित यह श्रद्धांजलि सभा केवल एक दिवंगत कवि को श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं थी, बल्कि शिवहर की साहित्यिक विरासत को याद करने और उसे आगे बढ़ाने का संकल्प भी थी।
रिपोर्टर - संजय
No Previous Comments found.