दलहन-मोटे अनाज की खेती, सिंचाई व्यवस्था और किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर
शिवहर - जिला में कृषि विकास को गति देने, किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'कृषि टास्क फोर्स' की एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कृषि, सिंचाई और सहकारिता विभाग के अधिकारियों को कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए।बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय और निर्देश दिए गए हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि खरीफ फसल के लिए बीज वितरण का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। अधिकारियों को दलहन (Pulses) और मोटे अनाज (Millet) की खेती पर विशेष फोकस करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।शिवहर क्षेत्र में मसूर की खेती बहुतायत में होती है। हालांकि,अरहर और चना की खेती कम होती है, जिसके लिए किसानों को विशेष रूप से प्रेरित करने की आवश्यकता है। दलहन कार्यक्रम के तहत इच्छुक किसानों का एक 'क्लस्टर' बनाया जाएगा। इस पहल का एटीएम (ATM), बीटीएम (BTM) और सलाहकारों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक खेती में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए 'आत्मा' को बेहतर परिणाम लाने के निर्देश दिए गए हैं। सभी बी.ए.ओ ) को निर्देशित किया गया है कि वे किसानों को बड़े क्षेत्र में दलहन की खेती करने के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान करें।
मिट्टी जांच कार्ड और मिट्टी जांच के नमूने प्राप्त करने की धीमी गति पर संज्ञान लेते हुए, इसे इसी महीने शत-प्रतिशत पूरा करने का सख्त निर्देश दिया गया है।बड़े किसानों को फूल की खेती के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। दलहन और फूल की खेती के लिए सर्वोत्तम मिट्टी की पहचान करने का कार्य किया जाएगा।'आत्मा' द्वारा किसानों को दलहन फसल की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। केले के पत्ते से फाइबर बनाने के प्रशिक्षण के लिए किसानों को वैशाली भेजा जाएग सांख्यिकी रिपोर्ट के अनुसार, जून और जुलाई माह में औसत से कम बारिश हुई है, जिसका सीधा असर धान की खेती पर पड़ेगा।सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए 'लिफ्ट इरिगेशन' का प्रस्ताव देने का निर्देश दिया गया है। डीएओ (DAO) को यह प्रस्ताव दो दिनों के भीतर प्रस्तुत करना होगा।
17 नलकूप बंद पाए गए हैं, जिनमें से 08 यांत्रिक दोष के कारण बंद हैं। कार्यपालक अभियंता को इन्हें शीघ्र दूर कराने (ठीक कराने) के निर्देश दिए गए हैं।डीएओ को जल निकायो और प्राकृतिक जल मार्गों को चिन्हित करने का निर्देश दिया गया है। सरकारी योजनाएं, सहकारिता और जमीनी स्तर पर निरीक्षण किया गया।उर्वरक दुकानों और प्रगतिशील किसानों को 'पीएम सूर्य घर योजना' के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अब तक 69 आवेदन प्राप्त हुए हैं। अगस्त माह की समाप्ति तक 50% उर्वरक विक्रेताओं को प्रेरित कर इसे लगवाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। डीसीओ को निर्देशित किया गया है कि सहकारिता के अंतर्गत पैक्स को सक्रिय करें और उन्हें आवश्यक जानकारी दें। पैक्सों के माध्यम से उर्वरक बिक्री के कार्यों का भी उल्लेख किया गया। केला उत्पादन,नारियल उत्पादन,ड्रिप और माइक्रो स्प्रिंकलर तथा हॉर्टिकल्चर के क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों के कार्यों की जांच की जाएगी। जो किसान कृषि क्षेत्र में बहुत बढ़िया काम कर रहे हैं या जो संघर्ष कर रहे हैं, उनके जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए डीएम स्वयं उनके पास जाएंगी। अंत में सभी संबंधित विभागों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर और योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
रिपोर्टर - संजय
No Previous Comments found.