रंगों के बीच अनदेखी सेवा — कैमरे में सजे होली दर्शन
वृंदावन के पावन धाम में स्थित श्री राधारमण मंदिर में जब होली आती है, तो केवल रंग नहीं उड़ते — उड़ता है प्रेम, बहता है रस, और झलकती है ठाकुरजी की चंचल मुस्कान। मुखारविंद से चरणारविंद तक रंगों में सजे राधारमण जू, मानो स्वयं भक्तों के बीच फाग खेल रहे हों। भीड़ उमड़ती है, स्वर उठते हैं, और हर हृदय बस एक ही अभिलाषा करता है — एक झलक मिल जाए। परंतु सभी वृंदावन नहीं पहुँच पाते। कई भक्त दूर बैठे होते हैं, और उनके लिए दर्शन का सेतु बनते हैं — आचार्य श्री के करकमल।
भीड़ के बीच एक साधना
जहाँ हर कोई आगे बढ़कर दर्शन करना चाहता है, वहीं कोई एक पीछे हटकर दूसरों के लिए दर्शन संजोता है। भीड़ के धक्कों के बीच, उड़ते गुलाल के बीच, सीमित स्थान के बीच, आचार्य श्री कैमरा थामे खड़े रहते हैं — मानो यह भी एक सेवा हो, मानो यह भी एक अर्चना हो। कभी छत पर, कभी एक कोने में सिमटकर, कभी स्वयं दर्शन छोड़ेकर — वो इस प्रयास में रहते हैं कि कोई भक्त दर्शन से वंचित न रह जाए।
क्षणों को संजोने की सेवा
जो हम कुछ क्षणों में देख लेते हैं, वो यूँ ही नहीं बन जाता। हर दृश्य को सहेजना, हर झलक को चुनना, रंगों को वैसा ही दिखाना जैसा वास्तविकता में था — यह सब केवल कौशल नहीं, यह सेवा है।
रंगों से भी गहरी सेवा
होली के रंग तो सभी देखते हैं, पर सेवा का रंग कम ही दिखता है।
जो स्क्रीन पर दिखाई देता है वो केवल दर्शन नहीं, बल्कि समर्पण का प्रतिबिंब है। जब दूर बैठा कोई भक्त राधारमण जू को रंगों में देख मुस्कुराता है, तो शायद उसे पता भी नहीं होता कि उन कुछ क्षणों के पीछे कितनी निष्ठा लगी है।
यही है होली का सच्चा रंग
राधारमण जू की होली में कोई नृत्य करता है, कोई कीर्तन करता है, और कोई — क्षणों को सहेजकर संसार तक पहुँचाता है। आचार्य श्री की यह सेवा मानो एक मौन कीर्तन है — जिसे सुना नहीं जाता, पर अनुभव अवश्य किया जाता है। और अंत में, जब स्क्रीन पर रंग झिलमिलाते हैं, तो लगता है —
यह केवल होली नहीं, यह सेवा का रंग है, जो राधारमण जू की कृपा से और आचार्य श्री के माध्यम से सब तक पहुँच रहा है।

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