सेवा महोत्सव का नहीं… ये तो कृपा का बुलावा है

जब बृज में स्वयंभू बृजनिधि, श्री राधारमण लाल जू अपनी अहैतुकी कृपा बरसाने का संकल्प करते हैं, तब केवल एक आयोजन नहीं होता—एक दिव्य आह्वान होता है… हर उस हृदय के लिए, जो स्वयं को प्रभु की सेवा में खोकर प्रभु में मिल जाना चाहता है।

गुरु-परंपरा से प्राप्त उस पावन विधान के अनुसार, जो पूर्व आचार्य वृंदों द्वारा पुष्ट किया गया है, प्रत्येक ढाई वर्षों में प्रत्येक गोसाईं जन का सेवा महोत्सव आता है—और ऐसा प्रतीत होता है जैसे विरह से तपते हृदयों पर कृपा की शीतल वर्षा हो रही है। यह वही समय होता है, जब “सेवा” केवल कर्तव्य नहीं रहती, बल्कि प्रेम का उत्सव बन जाती है।

इस वर्ष, यह दिव्य अवसर 28 अप्रैल की संध्या से 2 मई 2026 (राजभोग तक) तक ब्रजभूमि को अनुपम आनंद से भर देगा। इन दिनों में हर क्षण, हर झलक, हर सेवा—एक अनुभव बन जाती है… जिसे शब्दों में नहीं, केवल हृदय में महसूस किया जा सकता है।

30 अप्रैल 2026 (नृसिंह चतुर्दशी) की संध्या—जब अभिषेक होगा, तो मानो स्वयं देवता भी उस लीला के साक्षी बनने उतर आएंगे।

और फिर…

1 मई 2026 (श्री राधारमण प्राकट्य उत्सव)—वह पावन प्रभात, जब लाल जू का महाभिषेक, भव्य श्रृंगार और राजतिलक होगा… और संध्या को उत्सव दर्शन—जैसे साक्षात् गोलोक का द्वार खुल गया हो।

इस संपूर्ण महोत्सव की सेवा, श्रीमन्माधव गौड़ेश्वर वैष्णवआचार्य श्री मुकुंद कांत गोस्वामी जी के सान्निध्य में सम्पन्न होगी—जहाँ हर व्यवस्था, हर विधि, केवल एक ही भाव से प्रवाहित होती है—“श्री राधारमण लाल की प्रसन्नता के लिए…”

यह महोत्सव हमें कुछ सिखाने नहीं आता… यह हमें अपने भीतर ले जाता है—जहाँ हम समझते हैं कि सेवा करनी नहीं पड़ती, सेवा तो मिलती है… और जब मिलती है, तो वह जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बन जाती है।

तो क्या आप तैयार हैं…?

उस बुलावे को सुनने के लिए, जो शब्दों से नहीं, हृदय से आता है…

उस दर्शन के लिए, जो आँखों से नहीं, आत्मा से होता है…

और उस सेवा के लिए, जो पुण्य के लिए नहीं, प्रेम के लिए की जाती है…

तो आइए…

गोसाईं जनों की कृपा से प्राप्त इस दुर्लभ सेवा-सौभाग्य का रसास्वादन करें,

उनके सान्निध्य में बहती इस दिव्य धारा में स्वयं को समर्पित करें,

और श्री राधारमण लाल जू की प्रसन्नता में ही अपना परम आनंद खोजें।

! जय गौर !

! श्री राधारमणो जयति ! 

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