आयुष को कोर्ट में पेश किया गया, हाईकोर्ट ने दी अपनी मर्जी से रहने-आने-जाने की आजादी

शामली। आयुष मलिक प्रकरण में अब सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर नया मोड़ सामने आया है। हाईकोर्ट के आदेश को लेकर सोशल मीडिया पर शामली पुलिस को कथित फटकार लगाए जाने की खबरें प्रसारित होने के बाद पुलिस ने इन दावों को भ्रामक और तथ्यहीन बताया है। मामले में संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है। पुलिस के मुताबिक, 16 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में आयुष मलिक को अदालत के समक्ष पेश किया गया। आयुष और उसके पिता के पक्ष को सुनने के बाद अदालत ने आयुष को अपनी इच्छा के अनुसार कहीं भी आने-जाने और रहने की स्वतंत्रता प्रदान की।

सोशल मीडिया पर वायरल दावे से मचा हड़कंप

पुलिस का कहना है कि एक्स और फेसबुक पर कुछ अकाउंट्स से यह दावा किया गया कि हाईकोर्ट ने शामली पुलिस को फटकार लगाई। पुलिस ने इस दावे को गलत बताते हुए कहा कि न्यायालय ने पुलिस की ओर से किसी प्रतिशपथपत्र या जवाबी हलफनामे की अपेक्षा नहीं की थी और न ही पुलिस ने ऐसा कोई हलफनामा दाखिल किया। अब सोशल मीडिया पोस्ट पर FIR पुलिस के अनुसार, कथित भ्रामक सूचना प्रसारित करने वाले कई सोशल मीडिया अकाउंट्स के संबंध में थाना कोतवाली शामली में सुसंगत धाराओं में अभियोग दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि मामले में विवेचनात्मक कार्रवाई जारी है। पुलिस की दो टूक—बिना सत्यापन पोस्ट शेयर न करें शामली पुलिस ने आमजन से अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी पोस्ट, वीडियो अथवा खबर को सत्यापन के बिना आगे प्रसारित न करें। पुलिस ने कहा कि आपराधिक मामलों से जुड़ी भ्रामक सूचनाएं अनावश्यक भ्रम और अफवाह का कारण बन सकती हैं।

रिपोर्टर - अविनाश शर्मा 

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