अतिप्राचीन इलाई माता दरबार में तीन दिवसीय भव्य मेले का आयोजन, श्रद्धा और परंपरा का दिखेगा संगम

शाजापुर : शाजापुर जिले के ग्राम रानी बडौद स्थित अतिप्राचीन एवं चमत्कारिक स्थल इलाई माता शक्तिपीठ में चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी भव्य एवं विशाल मेले का आयोजन किया जा रहा है। यह मेला क्षेत्र की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर माता रानी के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।

मंदिर परिसर में गुड़ी पड़वा से ही धार्मिक आयोजनों की शुरुआत हो चुकी है। मंदिर को आकर्षक विद्युत सज्जा और फूलों से सजाया गया है, वहीं प्रतिदिन माता इलाई का विशेष श्रृंगार किया जा रहा है। श्रद्धालुओं के लिए महाआरती एवं महाप्रसादी का आयोजन निरंतर जारी है, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणजन और भक्तगण शामिल हो रहे हैं।

31 मार्च से होगी मेले की शुरुआत
     आयोजन समिति के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष तेरस, 31 मार्च 2026 को विशेष पूजा-अर्चना के साथ मेले का शुभारंभ होगा। इस दिन से ही मेला प्रांगण में दुकानों का सजना शुरू हो जाएगा और श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगेगी। धार्मिक माहौल के बीच भक्ति गीतों और जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहेगा।

1 अप्रैल को लगेगा विशाल मेला, उमड़ेगा जनसैलाब
     चैत्र शुक्ल पक्ष चौदस, 1 अप्रैल 2026 को मेले का मुख्य आयोजन होगा। इस दिन ग्राम रानी बडौद सहित आसपास के गांवों और दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। श्रद्धालु माता रानी के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य बनाएंगे।
परंपरा के अनुसार इस दिन महिलाएं माता रानी को चकली अर्पित करेंगी, जो वर्षों पुरानी आस्था का प्रतीक है। इसके साथ ही गांव की महिलाएं जल भरकर लाएंगी और माता जी तथा भैरव बाबा को जल अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगी। मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानों, झूलों और खान-पान की व्यवस्थाओं से पूरा परिसर जीवंत हो उठेगा।

2 अप्रैल को पूर्णिमा पर होगा समापन
   तीन दिवसीय मेले का समापन चैत्र पूर्णिमा, 2 अप्रैल 2026 को होगा। इस दिन भी श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रहेगी और पूरे दिन खरीददारी एवं धार्मिक गतिविधियों का क्रम जारी रहेगा। अंतिम दिन श्रद्धालु माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

प्रशासन और ग्रामीणों की तैयारियां पूर्ण
    मेले को सुव्यवस्थित एवं सफल बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन और ग्रामवासियों द्वारा आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सुरक्षा, पेयजल, स्वच्छता और यातायात को लेकर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम
    इलाई माता का यह मेला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक है। यहां आने वाले श्रद्धालु न केवल पूजा-अर्चना करते हैं, बल्कि ग्रामीण परंपराओं, लोकजीवन और सामाजिक एकता का भी अनुभव करते हैं।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मेले को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है और बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

रिपोर्टर : रमेश राजपूत

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